आगरा विवि ने धरना दे रहे दो दर्ज़न से अधिक छात्र नेताओं के खिलाफ़ दर्ज़ कराया मुकदमा

अर्धनग्न प्रदर्शन करते छात्र नेता

आगरा। शिक्षक, कर्मचारी और छात्र नेताओं के लगातार विरोध के बावजूद आगरा विश्वविद्यालय प्रशासन बिना झुके अपनी कार्रवाई को लगातार अंजाम दे रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जहां एक और पूर्व में कर्मचारियों द्वारा की गई हड़ताल के दिनों में काम की क्षति की भरपाई करने के लिए अतिरिक्त समय में कर्मचारियों को काम करने के आदेश दे चुका है तो वहीं अब छात्र संघ चुनाव की मांग पर अड़े और विश्वविद्यालय के पालीवाल परिसर में धरने पर बैठे 2 दर्जन से अधिक छात्र नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। जिसमें 18 ज्ञात और 10 अज्ञात छात्र नेताओं के खिलाफ 353, 506 और 509 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि 16 नवम्बर को आगरा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कर्मचारियों के लिए एक आदेश जारी किया गया था जिसमें 25 अक्टूबर को हुई घटना के कारण विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की हड़ताल से विश्वविद्यालय का कार्य प्रभावित होने का हवाला दिया गया और कर्मचारियों का आदेश दिए गए कि अगले 2 माह तक वह अतिरिक्त समय अथवा अवकाश के दिनों में इन कारों को पूरा करेंगे और इसके लिए उन्हें अलग से कोई बता भी नहीं दिया जाएगा। इस आदेश को लेकर कर्मचारियों में खासा रोष है तो वहीं दूसरी ओर 27 नवंबर से कुलसचिव कार्यालय के बाहर छात्र नेताओं द्वारा किए जा रहे धरने पर आपत्ति जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने एनएसयूआई और सपा छात्र सभा के 2 दर्जन से अधिक छात्र नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले दिनों छात्र नेताओं के प्रदर्शन से जहां शिक्षक और कर्मचारियों को चोटें आई थी तो वहीं अर्धनग्न प्रदर्शन कर छात्र नेता विश्वविद्यालय परिसर का माहौल खराब कर रहे हैं। धरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के माई के सामने का स्थान निश्चित कर रखा है लेकिन छात्र नेता निश्चित स्थान पर ना बैठकर कुलसचिव कार्यालय के बाहर धरना देकर विश्वविद्यालय प्रशासन के काम में बाधा डाल रहे हैं जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।

इस मामले में छात्र नेता पूर्व शर्मा का कहना है विश्वविद्यालय प्रशासन पूर्ण तरीके से तानाशाही रवैया अपना रहा है। जब कुलसचिव कार्यालय के सामने शिक्षक और कर्मचारी धरना दे सकते हैं तो हम क्यों नहीं।

बहरहाल मुकदमा लिखे जाने के बाद भी अभी भी कई छात्र नेता आगरा विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि पुलिस चाहे उन्हें गिरफ्तार करके क्यों ना ले जाए लेकिन जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी वह यहां से नहीं हटने वाले।

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