सरकार को भी नही पता प्रदेश में कितने हैं बन्दर, क्या ग्रोथ और क्या रोकथाम के उपाय

भले ही बन्दरो के आतंक से पूरा प्रदेश परेशान हो पर अभी तक सरकार को बन्दरो के बारे में कोई जानकारी नही है। आगरा के एक व्यक्ति द्वारा जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी गयी तो तीन माह का समय होने पर भी सरकार और प्रमुख सचिव वन विभाग द्वारा जानकारी नही दी गयी है।अब परेशान होकर उन्हें राज्य सूचना आयोग की शरण लेने और हाई कोर्ट में जनहित याचिका डालने पर विचार करना पड़ रहा है।

ताजनगरी में लगातार बन्दरो का आतंक है और नगर निगम इन्हें वन्य जीव बताते हुए कोई रोकथाम करने से पीछे हटता है।ऐसे में आगरा के गौरव बंसल ने राज्य सरकार से 19 सितंबर को पत्र के माध्यम से आरटीआई के तहत तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी कि यूपी में बन्दरो को किस श्रेणी में रखा गया है और उन्हें मारना किस श्रेणी के अपराध में आता है।यूपी में बन्दरो से निजात को क्या उपाय किये जा रहे हैं और कौन कौन से जिले सर्वाधिक प्रभावित हैं।बन्दरो की ग्रोथ रेट क्या है और इनकी जनसंख्या क्या है।

आरटीआई को 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री कार्यालय से उक्त सवालो के जवाब के लिए प्रमुख सचिव वन विभाग को पत्र लिख कर जानकारी देने को कहा गया और इसके बाद जब उन्होंने जानकारी नही दी तो 22 अक्टूबर को गौरव बंसल ने दोबारा पत्र लिख कर सूचना उपलब्ध न कराने पर उनके विरुद्ध राज्य सूचना आयोग की शरण लेने केलिए एक पत्र लिखा गया पर उस पर भी कोई विचार नही किया गया और अब तक उन्हें जवाब न मिला।अब गौरव बंसल मामले में राज्य सूचना आयोग की शरण लेने और हाई कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।उनका कहना है कि राज्य सरकार का दायित्व प्रदेश वासियो कि सुरक्षा है।हिमाचल में बन्दर मारने की परमिशन दे दी गयी है पर यूपी में कोई रोकथाम के उपाय नही किये जा रहे हैं।

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