D.E.I. में शोध संचार कौशल बढ़ाने हेतु ऑनलाइन वर्कशॉप का आयोजन, कई देशों के विशेषज्ञों ने लिया भाग

 
आगरा। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) और स्कूल ऑफ एजुकेशन, शिक्षा संकाय, दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, दयालबाग आगरा (PMMMNMTT), द्वारा  एल्सवियर के सहयोग से “साइंसडायरेक्ट और मेंडेली के माध्यम से अनुसंधान सम्प्रेषण कौशल उत्थान” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया।
 
कार्यशाला समन्वयक एवं आइक्यूएसी समन्वयक डॉ. अमित गौतम ने कार्यशाला की संक्षिप्त जानकारी और विशेषज्ञ के परिचय के साथ कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए इस कार्यशाला को आयोजित करने का उद्देश्य एवं परिचय देते हुए बताया कि वर्तमान परिदृश्य में यह शोधकर्ताओं के साथ-साथ शिक्षाविदों के लिए भी उनके शोध संचार कौशल को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है जो कि उनके शैक्षणिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस ऑनलाइन कार्यशाला में 1800 अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग किया,  

अंतर्राष्ट्रीय स्तर से सऊदी अरब, ताइवान एवं नाइजीरिया तथा भारत वर्ष के प्रत्येक राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, पुदुचेरी, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख़ से विभिन्न प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसरों व शोधार्थियों द्वारा बड़ी संख्या में सहभागिता की गयी।

प्रो. नंदिता सत्संगी (समन्वयक, स्कूल ऑफ एजुकेशन) द्वारा प्रतिभागियों को स्कूल ऑफ एजुकेशन द्वारा संचालित की जाने वाली कार्यशालाएँ, शोध परियोजनाएँ, सामग्री उत्पादन, ऑनलाइन परामर्श मंच और विस्तार कार्य से अवगत कराया गया।
 
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रो संजीव स्वामी ने उल्लेख किया कि दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, शोध कार्यों की  गुणवत्ता बनाये रखने के लिए प्रयत्शील है जिसके तहत इंस्टीट्यूट ने नौ शोध डिवीज़न के तहत शोध कार्यों को बढ़ावा दिया है, इंस्टीट्यूट प्रतिदिन नवाचार और दक्षता बढ़ाने हेतु प्रयत्शील है।

इस ऑनलाइन कार्यशाला के मुख्य विषय विशेषज्ञ विशाल गुप्ता, साउथ एशिया एल्सवियर द्वारा शिक्षक व शोधार्थियों को शोध की वैज्ञानिक प्रक्रिया से अवगत कराया गया, साथ ही साइंसडायरेक्ट और मेंडली की बुनियादी सुविधाओं और कार्यात्मकताओं का महत्व बताया। कार्यशाला-सत्र के दौरान विशाल गुप्ता द्वारा शोध के कार्य-प्रवाह को समझना, अच्छे जर्नल के संपादक क्या चाहते हैं, वे क्या पसंद नहीं करते हैं, प्रकाशन कार्य-प्रवाह, शोध निधिकरण के अवसर कैसे तलाशे, संपादकीय प्रक्रिया, एक लेख लिखने में क्या करना है और क्या नहीं, सही रिसर्च जर्नल का चुनाव कैसे करे, गुणवत्तापूर्ण सामग्री का महत्व, साइंसडायरेक्ट, संदर्भ प्रबंधक मेंडली- कैसे उपयोग करें इत्यादि विषय पर अपने विशेषता के सभी महत्वपूर्ण बिदुओं पर प्रकाश डाला।

विशाल गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों के सवालो को स्वीकार करते हुए  बड़ी सहज तरीके से जिज्ञासा शांत की। अंत में, डॉ अमित गौतम, कार्यशाला समन्वयक ने प्रतिभागियों से प्रतिक्रिया ली जिसमे विशेष तौर पर शामिल प्रो. परिमल व्यास, कुलपति, महाराजा सियाजी विश्वविद्यालय वड़ोदरा गुजरात ने कार्यशाला के प्रति अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि वे पूरे कार्यशाला सत्र में प्रतिभागी की भूमिका में रहे और इस तरह की कार्यशाला को  वर्तमान समय की आवश्यकता  बताया जिससे कि शोध कार्यों की गुणवत्ता को बनाए रखा जा सके।

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