MBBS के छात्र ने उठाया ऐसा कदम, बदल कर रख दिया गांव के पिछले 20 साल का इतिहास

आजादी के सात दशक बाद भी राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित एक गांव में इतने बदतर हालात हैं कि कोई भी यहां अपनी बेटी की शादी नहीं करना चाहता था या गांव में लड़कों की शादियों का सिलसिला दो दशक पहले ही थम चुका था। इस गांव से पिछले 22 साल से कोई बारात नहीं निकली है। यानी इन 22 साल में इस गांव में एक भी लड़का दूल्हा नहीं बना है। यह सिलसिला 1996 के बाद से शुर हुआ।

लेकिन अपने गांव के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाले पवन सिंह ने 22 साल पुराने इस इतिहास को बदल दिया है। पवन की शादी हाल ही 29 अप्रैल को हुई। जिसके कारण पूरा गांव दुल्हन की तरह सजा और हर किसी ने दुल्हन का स्वागत सत्कार ऐसे किया जैसे उनके ही घर में नई बहु आई हो।

सरकार तमाम विकास के वायदे करती रही लेकिन धौलपुर से मात्र 6 किलोमीटर की दूरी पर बसे राजघाट गांव की आज तक किसी ने सुध नहीं ली। जिसके कारण इस गांव में सड़क और बिजली तक नहीं है और पानी के लिए मात्र पूरे गांव के लिए एक ही हैंडपंप है जिसमें भी पानी खारा पानी आता है। ऐसा लगता था कि गांव में आजादी के बाद से किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई सुध नहीं ली हो। लोग अपनी बेटी के रिश्ते के लिए आते लेकिन इन समस्याओं के कारण वह वापस नहीं आते।

ये किस्सा है चंबल नदी के किनारे स्थित राजघाट गांव का, जहां एक शादी ने ठहरी हुई जिंदगी में बड़ी हलचल मचा दी है। हर ओर इस गांव के ही चर्चे हो रहे हैं। शादी भी अब इसलिए हुई कि इस गांव के हालात बदलने लगे हैं। हालात बदलने का बीड़ा जयपुर के एसएमएस कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे अश्वनी पाराशर और उनके साथियों ने उठाया और तीन साल की मेहनत के बाद यहां फिर से रिश्ते आने लगे।
 
इन छात्रों ने ‘सेव राजघाट’ अभियान चलाया। एक कच्ची सड़क बनवाई, शौचालय बनवाए, सोलर से बिजली और आरओ से पीने के पानी की व्यवस्था की। इन व्यवस्थाओं के बाद अब यहां लोग अपनी बेटी की शादी करने को तैयार हुए हैं। यहां के निवासी पवन की शादी होने के बाद दो और बारातों की तैयारियां चल रही हैं। इस गांव में 40 से अधिक परिवार रहते हैं और आबादी 300 से अधिक है।

धौलपुर निवासी अश्वनी पाराशर ने बताया कि जब वे 2015 में इस गांव में पहुंचे, तो ग्वालियर रोड से इस गांव तक पहुंचने के लिए रास्ता बड़ा ही कच्चा व दुर्गम था। तब उन्होंने व उनके साथियों लोकेंद्र, प्रहलाद, प्रणव, सौरक्ष और चौबसिंह ने हालात बदलने का बीड़ा उठाया। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन की याचिका दायर की, वहीं क्राउड फंडिग की व्यवस्था की और साथ ही एनजीओ के माध्यम से यहां गांव में सुविधाएं देने के प्रयास शुरू किए। कच्ची सड़क है, लेकिन अब इस रास्ते पर वाहन दौड़ सकते हैं। शौचालय बने, जिसका लोग उपयोग कर रहे हैं। वहीं, पवन की शादी में सोलर लैम्प की मदद रौशनी बिखेरी गई।

छात्रों के इस प्रयास ने अब रंग ला रहे हैं। इन छात्रों ने गांव वालों की शराब छोड़ने सहित अन्य कुप्रथाओं के जाल से निकलने के लिए शपथ तक दिलाई। गांव वालों को अपने बच्चों को पढ़ने देने के लिए प्रोत्साहित किया। हाईकोर्ट में सुनवाई अभी जारी है। ‘धौलपुर के गांवों के हालात काफी बदतर हैं। इस गांव में पवन की शादी से 22 साल बाद खुशियां लौटकर आ गई हैं लेकिन अभी बहुत कुछ बदलना बाकी है।

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