मैनेजमेंट ने की फर्जी शिक्षकों की भर्ती, राजा सूरजमल इंटर कॉलेज का मामला

आगरा। तमाम सरकारी आदेशों के बावजूद प्रबंधतंत्र ने प्राथमिक विद्यालय में फर्जी शिक्षकों की भर्ती कर डाली। जिन शिक्षकों की भर्ती की गई है वो किसी भी शैक्षिक मानकों को पूरा नही करते है। ऐसा कहा जा रहा है कि मैनेजमेंट ने एक भारी भरकम रकम लेकर विद्यालय में फर्जी शिक्षकों की भर्ती की है।

जी हां हम बात कर रहे आगरा के मशहूर इंटर कॉलेज राजा सूरजमल इंटर कॉलेज से संबद्ध प्राइमरी स्कूल की जो आगरा के थाना लोहामंडी क्षेत्र के जाट हाउस में स्थित है। ये कॉलेज आगरा में अपना एक अच्छा खासा इतिहास रखता है। सन 2013 में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे बृजमोहन त्यागी की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई। बी.एड और टेट किये बिना ही बृजमोहन त्यागी को प्रबंधतंत्र ने सहायक अध्यापक नियुक्त कर दिया।

शिकायत कर्ता राजवीर त्यागी ने पहले विभाग और फिर माननीय उच्च न्यायालय में 2016 में बृजमोहन त्यागी के खिलाफ याचिका दायर की जिसके एवज में कोर्ट ने इस मामले में सयुंक्त शिक्षा निदेशक को जांच के बाद कार्यवाही करने का आदेश दिया।कोर्ट के आदेश पर हुई जांच में पाया गया था कि बृजमोहन त्यागी की ओर से संलग्न किया गया शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रमाणपत्र फर्जी था। ऐसे में तत्कालीन सयुंक्त शिक्षा निदेशक डॉ प्रदीप कुमार ने 26 अगस्त 2014 को हुए बृजमोहन त्यागी के नियुक्ति अनुमोदन को निरस्त कर दिया गया। जिसके एवज में बृजमोहन त्यागी का वेतन रोके जाने की कार्यवाही हुई।

बताते चलें कि बृजमोहन त्यागी ने नौकरी की नियुक्ति के दौरान जिन प्रमाणपत्रों को पेश किया गया था वह प्रमाण पत्र उसके थे ही नहीं। जो प्रमाण पत्र टेट का प्रस्तुत किया गया था वह किसी अरुण कुमार सक्सेना पुत्र राम अवतार सक्सेना का था। जिस कॉलेज से बृजमोहन त्यागी बीएड करने का दावा करता है। उस कॉलेज के प्रधानाचार्य ITI में स्वीकार किया है कि उक्त व्यक्ति ने उनके कॉलेज से बीएड किया ही नही है। बताते चले कि 2010 से बिना टेट के कोई भी प्राथमिक स्तर का शिक्षक नही बन सकता है।

शिकायतकर्ता ने जब फर्जी नियुक्ति की शिकायत करने संयुक्त शिक्षा निदेशक के कार्यालय पहुंचे तो आरोपी के पैरोकारों ने शिकायतकर्ता को जमकर पीटा था, जिसके एवज में स्थानीय पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले गई। जिसमें पिटाई करने वालों को पुलिस ने छोड़ दिया और शिकायतकर्ता को ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

अब देखना होगा कि कब तक ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति होती रहेगी जो अपने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति लेते रहेंगे। ऐसे शिक्षक जो खुद ही पढे नहीं हों वो छात्रों को क्या शिक्षा देंगे। सरकार को ऐसे शिक्षकों के खिलाफ ठोस कदम उठाना चाहिए जिससे भविष्य में कभी कोई ऐसा कदम न उठा सके।

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