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बाल श्रम रोकने व मजदूरों के उत्थान के लिए कनाड़ा देश से सीख सकता है भारत – जेफ़ ब्रोमले

by admin

आगरा। कनाडा में बाल श्रम नहीं है। उनके यहां 14 वर्ष के बाद किशोर काम कर सकते हैं, लेकिन उनके लिए सप्ताह में पांच दिन स्कूल जाना अनिवार्य है। इन किशोरों को भी पार्ट टाइम के रूप में ऐसा काम करने की अनुमति है, जो किसी भी प्रकार से उनके लिए हानिकारक न हों लेकिन भारत की स्थिति कुछ विपरीत है, यह कहना था यूनाइटेड स्टील वर्कर्स के काउंसिल चेयर जेफ ब्रोमले का।

पिछले 9 दिनों से भारत में भ्रमण पर रहने के बाद यूनाइटेड स्टील वर्कर्स के काउंसिल चेयर जेफ ब्रोमल रविवार को उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन की विजिट करने के लिए आगरा आए और आगरा जिले में उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के मजदूर हित और बाल श्रम को रोकने के लिए चल रहे कार्यों की जानकारी ली। विजिट करने के बाद यूनाइटेड स्टील वर्कर्स के काउंसिल चेयर जेफ ब्रोमले फतेहाबाद रोड स्थित होटल गंगारत्न में पत्रकारों से रूबरू हुए। पत्रकार वार्ता के दौरान
उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन द्वारा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के दैनिक मानदेय, उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चल रहे संघर्ष और प्रयासों की सराहना की।

पत्रकारों से रूबरू होते हुए जेफ ब्रोमले ने कहा कि भारतीय श्रमिकों को मानदेय बेहद कम मिलता है। इन श्रमिकों की दशा सुधारने के लिए लंबे संघर्ष की आवश्यकता और इसकी लड़ाई उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा लड़ रहे है। उन्होंने बताया कि कनाडा में श्रमिक पांच दिन ही कार्य करते हैं। उनका मानदेय इतना है कि वे अपना और अपने परिवार का भरण पोषण बेहद आसानी से कर सकते हैं लेकिन भारत में स्थिति विपरीत है। यहां मजदूर की मजदूरी तो कम है ही वहीं सरकार उनकी स्वास्थ्य व शिक्षा पर भी पूरी तरह से ध्यान नहीं देती है।

प्रेसवार्ता के दौरान जेफ ब्रोमेल ने कहा कि वे नौ दिन से भारत में हैं। इस भ्रमण के दौरान वे उड़ीसा गए, जहां जंगल में काम करने वाले श्रमिकों का जीवन स्तर सुधारने के लिए उनकी यूनीय​न ने प्रयास शुरू किए हैं। वे उन्हें विभिन्न मशीनरीज भी उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वे अपने उत्पाद बना सकें, उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की यूनियन द्वारा ब्राडिंग भी की जाती है।

जेफ ब्रोमेल ने बताया कि कनाडा में प्रतिदिन श्रमिकों को 350 से 450 डॉलर मिलता है, जो भारतीय श्रमिकों को मिलने वाले मेहनताने से बहुत अधिक है। इसके साथ ही उनके देश में चाइल्ड लेबर नहीं है। उनके यहां किशोर काम कर सकते हैं, लेकिन उनके लिए सप्ताह में पांच दिन स्कूल जाना अनिवार्य है। इन किशोरों को भी पार्ट टाइम के रूप में ऐसा काम करने की अनुमति है, जो किसी भी प्रकार से उनके लिए हांनिकारक न हों। जेफ ने बताया कि श्रमिकों की दशा सुधारने के लिए उनकी यूनियन के सदस्य दो से पांच सेंट जमा करते हैं। अब ये धन एक बड़ा एमाउंट बन चुका है, जिससे श्रमिकों की दशा सुधारने के लिए यूनियन काम कर रही है।

वहीं ताजमहल के शहर आगरा को लेकर जेफ ने कहा कि यह भारत में उनका पहला विजिट है। आगरा के श्रमिकों को लेकर वे अपनी यूनियन के साथ चर्चा करेंगे। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा के प्रयासों को भी सराहा। प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन की ओर से राहुल शर्मा, शाकिर खान मौजूद रहे।

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