बेटी दिवस : ये देश धर्म की बात नहीं, संसार बचेगा बेटी से

आगरा। बेटी जिसे कभी बोझ समझा जाता था। किसी के घर पैदा हुई तो माँ को कोसा जाता था। कहा जाता था कि अब वंश कैसे चलेगा। लेकिन आज इसी बेटी ने अपने दम पर समाज की रूढ़िवादी सोच को बदल अपने आप को इस समाज में स्थापित किया है। भले ही इस सोच को बदलने में अरसा निकल गया हो लेकिन बेटियों ने आज अपने दम पर सभी को दिखा दिया कि बेटी किसी से कम नहीं है। यह सभी भाव आज नटरांजली थिएटर्स आर्ट्स के जनजागरूकता कार्यक्रम में देखने को मिला।

बेटी दिवस के उपलक्ष्य में
नटरांजलि थियेटर आर्ट्स और श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसायटी की ओर गाँधी आश्रम, संजय प्लेस पर एक नाट्य प्रस्तुत किया गया। इस नाटय में नटरांजली थिएटर्स आर्ट्स के रंग कर्मियों की ओर से देश की बेटियों को समर्पित कई नाटक प्रस्तुत किए गए। इन नाटकों के माध्यम से रंग कर्मियों ने बेटी की उपलब्धियों को इस समाज के सामने रखा और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को सभी को संदेश दिया। इस नाट्य प्रस्तुति के दौरान “अब तो मिलकर सोचो” नाट्य का मंचन सभी को पसंद आया। अपने बेहतर अभिनय के माध्यम से कलाकारों ने बेटी काली, बेटी दुर्गा, बेटी गंगा वसुंधरा, जो अपमान करे बेटी का वो पापी है इंसान नहीं, ये देश धर्म की बात नहीं संसार बचेगा बेटी से, बेटों से बढ़कर बेटी हैं,परिवार बचेगा बेटी से, इन लयबद्ध संवादों को सुनकर दर्शक भावविभोर हो गये।
इसके साथ ही, जल बचाओ, ऊर्जा संरक्षण, स्वच्छ भारत निर्माण एवं यमुना बचाओ जैसी गम्भीर विषय को एक माला में पिरोकर लोगों को इनके प्रति जागरूक बनाया।

बेटी दिवस पर इन नाटक का संयोजन बाँके बिहारी वैलफेयर सोसायटी के संस्थापक मदन मोहन शर्मा ने एवं निर्देशन अलका सिंह ने किया। मदन मोहन शर्मा और अलका सिंह का कहना था कि आज बेटियों ने अपने दम पर पूरे विश्व में अपनी पहचान बनाई है। आज बेटिया बेटो से आगे है इसलिए तो बेटी दिवस मनाया जाता है लेकिन समाज में आज भी कुछ ऐसे लोग है जिनके कारण बेटियां सुरक्षित नहीं है। ऐसे लोगों को भी सबक सिखाने की जरूरत है।

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