मजदूरों के हित और अधिकारों की मांग को लेकर ग्रामीण मजदूर संगठन ने दिया धरना, रखी 11 सूत्रीय मांग

आगरा। केंद्रीय श्रम संगठनों के आवाहन पर उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा के नेतृत्व में धनौली स्थित श्रमिक विद्यालय पर धरना दिया। इस धरने में श्रमिक व मजदूर शामिल हुए और मजदूरों की समस्याओं व अधिकारों की बात को मंच के माध्यम से सामने रखा। श्रमिक विद्यालय पर धरना देने के बाद संगठन के अध्यक्ष मजदूरों के प्रतिनिधि मंडल के साथ जिला मुख्यालय पहुँचे जहाँ एसीएम चतुर्थ विनोद कुमार गुप्ता आगरा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके बाद सहायक श्रमायुक्त आगरा कार्यालय पहुँचे जहाँ पर सहायक श्रमायुक्त सर्वेश कुमार को भी प्रधानमंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम सम्बोधित 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा और मजदूरों के कल्याण के लिए मांगो को पूरा किये जाने की मांग की।

उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा का कहना है कि कोविड-19 का सर्वोधिक असर अंसगठित क्षेत्र के मजदूरों पर हुआ हैं। लॉकडाउन होने के कारण सभी काम बन्द होने के कारण रोज खाने व कामने वाले इस वर्ग की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई हैं। लॉकडाउन के समय में इनके पास पर्याप्त भोजन की व्यवस्था नहीं थी साथ ही कई कठिनाईयों का सामना करते हुए हजारों किलोंमीटर की यात्राऐं पैदल ही पूरी की। आज इस वर्ग की ओर विशेष ध्यान देते हुए इन्हें बी.ओ.सी.डब्लू बोर्ड के तहत संचालित आर्थिक सहायता योजना का लाभ श्रमिकों को दिलाने के लिए 11 सूत्रीय माँग पत्र दिया गया है।

अंसगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों के लिए 11 सूत्रीय माँग पत्र:-

1- ईट भट्टा मजदूरों के कार्य के घण्टे निश्चित किये जाए, ईट भट्टों पर स्वास्थ व सुरक्षा की व्यवस्था की जाए जिसके तहत प्रत्येक भट्टे पर समस्त श्रमिकों को सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जाए, प्रत्येक माह प्रत्येक श्रमिक का स्वाथ्य परीक्षण किया जाए, महिला श्रमिकों के सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ईट भट्टे पर शौचालय की व्यवस्था की जाए, श्रमिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ईट भट्टे पर पीने योग्य शुद्ध पेय जल की व्यवस्था की जाए, ईट भट्टा श्रमिकों के बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक ईट भट्टे पर एक शिक्षा केन्द्र की व्यवस्था की जाए जिससे ये मासूम बच्चें बाल मजदूरी के दल-दल से बाहर निकल सकें और शिक्षित होकर शिक्षा के अधिकार का आन्नद ले सकें और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
एक राष्ट्र एक कार्ड योजना के तहत बी.ओ.सी.डब्लू बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों को भी इसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए जिससे वे देश के किसी भी राज्य या शहर में बी. ओ. सी. डब्लू बोर्ड के तहत संचालित योजनाओं का लाभ ले सकें।

2- पत्थर खदान श्रमिकों के लिए राजस्थान सरकार की तरह उ- प्र- में भी सिलिकोशिस बोर्ड बनाया जाये तथा आगरा जनपद के तांतपुर क्षेत्र में पत्थर खदान श्रमिकों के लिए स्वास्थय केन्द्र की स्थापना की जायें।

3- ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर अंसगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कम से कम 600 रूपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन दिया जाये तथा 18000रू प्रतिमाह वेतन दिया जाये तथा 8 घण्टे काम लिया जाये। 8 घण्टे से अधिक काम लेने पर ओवर टाईम मजदूर को दिया जाये।

4- प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर लघु सचिवालय की स्थापना की जाये जिससे गाँव के गरीब श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर योजनाओं का लाभ मिल सके।

5- प्रत्येक लेबर चौक पर मजदूरों के बैठने के लिये स्थाई जगह तथा श्रमिक सहायता केन्द्र खोले जायें, जिससे श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिले पेयजल व शौचालय की व्यवस्था की जायें।

6- बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार को आशा व आगनबाडी स्वंय सेवकों की तर्ज पर एक पूर्णकालिक समाजिक स्वंय सेवक रखना चाहिए, इन स्वंय सेवकों को कई विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए ताकि बच्चों की पहॅुच सभी अधिकारों तक हो सके।

7- बाल श्रम अधिनियम और बाल संरक्षण कानून को लागू करने के लिए कडे कानून अपनाने चाहिए साथ ही निरीक्षणों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, यदि मौजूदा मशीनरी पर्याप्त नहीं है तो ग्राम पंचायत व नगर पालिका वार्ड में से बेहतर अधिकारी को इन अधिनियमों को लागू करने के लिए निरीक्षण शक्तियों के साथ नामिंत किया जाना चाहिए।

8- शहरों व ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिक कालोनियों का निर्माण कराया जायें जिससे गरीब श्रमिकों को रहने के लिए आवास मिल सकें।

9- जो निर्माण श्रमिक गाँव सें या लेबर चौक से निर्माण कार्य में काम करने जाते हैं ऐसे श्रमिक कहाँ से प्रमाण पत्र लाकर देंगे। ऐसे श्रमिकों को स्वंय का प्रमाण पत्र मान्य किया जाये या ट्रेड यूनियन को सत्यापन करने का अधिकार दिया जायें।

10- असंगठित क्षेत्र की श्रमिक महिलाओं को समान कार्य का समान वेतन व अधिकार दिया जाये तथा कार्य स्थल पर स्वास्थ्य व सुरक्षा का लाभ मिलें] निर्माण क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिक महिलाओं को कौशल विकास योजना के अतंर्गत जोडा जाये जिससे श्रमिक महिलाए अपने कौशल को विकसित कर समानता के अधिकार समान कार्य का समान वेतन आदि अधिकारों का लाभ ले सके, साथ ही बी.ओ.सी.डब्लू बोर्ड योजना के तहत सिलाई मशीन से लाभान्वित कराया जायें जिससे वे अपना स्वंय का रोजगार चला सकें। तथा निमार्ण श्रमिकों को सौर ऊर्जा योजना से लाभान्वित कराया जाये।

11- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना (मनरेगा) के तहत 200 दिन काम दिया जायें। श्रमिकों को कम से कम 600 रूपये प्रतिदिन न्यूनतम वेतन दिया जाये।

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