पत्थर खदान मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा गूंजेगा दिल्ली में

जयपुर। पत्थर खदान मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर इंटरनेशनल बिल्डिंग एंड वुड वर्कर संस्था की ओर से जयपुर में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। दो दिनों तक चली इस मीटिंग में पत्थर खदान में काम करने वाली ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों के साथ-साथ समाजसेवी और एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दो दिवसीय इस मीटिंग के मुख्य अतिथि BWI के उपाध्यक्ष आर सी खोटिया थे।

दो दिवसीय इस मीटिंग में पत्थर खदान में काम करने वाले मजदूर और असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों के स्वास्थ्य पर चिंतन किया गया। बीडव्लूआई की रिपोर्ट के अनुसार ईट भट्टा और पत्थर खदान में काम करने वाले मजदूरों में सिलिकोसिस बीमारी सबसे अधिक पाई जा रही है जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। ट्रेड यूनियन और एनजीओ के पदाधिकारियों का कहना था कि इस बीमारी के चलते मजदूर का शरीर पूरी तरह से खोखला हो जाता है और डॉक्टर इसका इलाज टी बी का रोग समझ करते रहते है। दो दिनों तक चली इस मीटिंग में बी डव्लू आई के साथ साथ पत्थर खदान में काम करने वाले ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने ईट भट्टे और पत्थर खदान में काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने का निर्णय लिया है। जिससे सरकार इन मजदूरों की ओर ध्यान दें और इन मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर अलग से बोर्ड का गठन किया जा सके।

इस मीटिंग में आगरा जिले का प्रतिनिधिवत करने पहुंचे उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा का कहना था कि पत्थर खदान में काम करने वाले मजदूरों के काम करने के घंटे तय किए जाएं साथ ही समय-समय पर इन मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा शिविर लगाए जाएं। जिससे इन मजदूरों के स्वास्थ्य परीक्षण हो सके। वही पत्थर खदान मालिकों को भी इनके सुरक्षा के प्रति सतर्क होना पड़ेगा और इनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलानी होंगी। जिससे मजदूरों के बच्चे पढ़ लिख कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

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