कुंभ स्नान करने जा रहे लोगों में जेल में निरुद्ध कैदियों के प्रति बदल रही है आस्था, जानिए कैसे

आगरा। जेल में बंद कैदियों का नाम सुनते ही आम लोगों का मन घृणा से भर उठता है लेकिन यह कैदी भी आम व्यक्ति की तरह ही हुनरमंद होते हैं लेकिन इनका यह हुनर जेलों में बंद हो जाता है। सरकार और जेल प्रशासन की मदद से जेलों में बंद हुनर आजकल कुंभ मेले में देखने को मिल रहा है। सरकार की मदद से जेल प्रशासन ने कुंभ मेले में एक प्रदर्शनी लगाई है। इस प्रदशनी मे जेलों के बंद कैदियों की ओर से बनाये गए सामानों की प्रदर्शनी लगाई गई है जो यहां आने वाले लोगो को खूब भा रही है। लोग कुंभ स्नान के बाद इस प्रदर्शनी का अवलोकन जरूर कर रहे है और अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर कैदियों का मनोबल बढ़ा रहे है। इतना ही नही कुंभ में मिल रहे रिस्पॉन्स से जेल अधिकारी भी उत्साहित हैं।

इस मेले में पहुँचे आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि हर कोई गुनाहगार बनना नही चाहता है लेकिन जिन लोगों ने गुनाह किया है वो सुधरना भी चाहते है। इसलिए तो जेल में भी अपने हुनर को जिन्दा रखे है और जेल से छूटने के बाद यह हुनरबन्द इसी तरह से अपनी रोजी रोटी कमा संकेंगे। आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि कुम्भ मेले में यूपी की लगभग दस जेलों की सामान की प्रदर्शनी लगाई गई है जिन्हें कैदियों ने तैयार किया है जो लोगों को खूब भा रही है।

आयोजकों ने बताया कि आगरा सेंट्रल जेल में बनी फोल्डिंग कुर्सी की तो इतनी डिमांड है कि पूरा नहीं कर पाए। लोगों को मना करना पड़ा। माला जपने का स्टेंड, हवनकुंड, चिमटा, चकला, फर्नीचर, दरी, फिनायल, अचार, मुरब्बा के साथ बेड़ी और हथकडियो को कैदियों द्वारा बनाया गया है, जिसे प्रदर्शनी में बिक्री के लिए रखा गया है।

आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि अभी तक जेल में बंद कैदियों को लोग नफरत की नजरों से देखते थे लेकिन कुम्भ में उनके हुनर ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। कारागार विभाग का यह बहुत अच्छा प्रयास है। इससे उनके हुनर को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। लोगों में हुनरमंद कैदियों के प्रति सहानुभूति भी जाग रही है। ऐसे आयोजन समय समय पर होते रहना चाहिए।

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