अभी नहीं जागा नगर निगम, सड़क किनारे रात काटने को मजबूर लोग

आगरा। दिसंबर का महीना है। रात में सर्द हवाएं चल रही है तो ठंड का कहर भी बढ़ रहा है मगर नगर निगम प्रशासन अभी भी कुंभकरण की नींद सोया हुआ है। न कोई अलाव जलाने की व्यवस्था न नगर निगम के रैन बसेरों के अभी तक ताले खुले है। क्या है सच्चाई ताजनगरी आगरा के रैन बसेरों की देखते हैं इस रिपोर्ट में।

दिसंबर के महीने में धीरे-धीरे सर्दी बढ़ रही है। रात में सर्द हवाएं चल रही है और इस मौसम में ठिठुरन भी है। हालांकि अक्टूबर तक नगर निगम प्रशासन ताजनगरी आगरा में चौराहों पर अलाव जलाने की व्यवस्था के साथ रैन बसेरों में गरीब मजदूर और बेसहारा लोगों को रात काटने के लिए रैन बसेरों के ताले खुलवा देता था मगर अभी तक ताजनगरी आगरा में ना तो रैन बसेरों के ताले खुले हैं और ना ही नगर निगम प्रशासन कुंभकरण की नींद से जागा है। हालात कुछ ऐसे हैं कि एस.एन. मेडिकल कालेज में आने वाले मरीज और तीमारदार खुद अपनी खरीद कर लकड़ी ला रहे है और रात काट रहे हैं।

एसएन मेडिकल कॉलेज के बाहर रैन बसेरे पर बैठे तीमारदार नगर निगम प्रशासन को कोसते हैं तो अपनी रात काटने के लिए खुद ही इंतजाम भी कर रहे है। एसएन मेडिकल कॉलेज पर नगर निगम प्रशासन की व्यवस्था राम भरोसे है। ना यहां कोई नगर निगम प्रशासन ने अलाव की व्यवस्था की है। यहां तीमारदार और मरीजों को देखने के लिए नगर निगम प्रशासन अभी तक जागा नही है।

एसएन मेडिकल कॉलेज पर नगर निगम की इस अव्यवस्था के बाद अब आपको ले चलते हैं छीपीटोला नगर निगम रैनबसेरे पर। छीपीटोला रैन बसेरे का हाल भी आपके सामने है। यहां नाम के लिए रैन बसेरा है मगर रुकना तो लोगों को सड़क पर ही पड़ता है। नगर निगम द्वारा बनाया गया रैन बसेरे पर ताला लटका है। लोग बताते हैं कि यहां ताला नहीं खुलता है। यहां पर मौजूद नगर निगम के कर्मचारी रैनबसेरे को अपने निजी कार्य के लिए प्रयोग में लेते है। छीपीटोला के रेनबसेरे पर ताला लटके होने से परेशान लोग सड़क किनारे रात काटने को मजबूर है। यानी अव्यवस्था ही अव्यवस्था है। यहां ठंड बढ़ रही है। मगर नगर निगम अभी भी गहरी नींद में सोया है। सड़क किनारे रात काटते लोग नगर निगम प्रशासन को कोस रहे हैं।

पर अब देखना होगा कि नगर निगम अपनी गहरी नींद से कब जागता है। कब लोगों के लिए अलाव की व्यवस्था होती है और कब इन रैनबसेरो में लोग रात काट पाते है।

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