Agra. ‘सर, मजदूरों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। उन्हें काम नहीं मिल रहा है। दो वक्त की रोटी जुटा पाना भी मजदूर के परिवार के लिए कठिन हो रहा है। अगर उनके लिए उचित कदम नहीं उठाए गए तो मजदूर भुखमरी की कगार पर आ जाएगा’ यह शब्द उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से कहे।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की और मजदूर की वास्तविक स्थिति से उन्हें रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के बाद से मजदूरों को काम कम मिल रहा है जिससे उनके जीवन यापन में भी काफी समस्याएं सामने आ रही हैं।
उत्तर प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिको की संख्या करोड़ो में है जिनका प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है। इन्ही में से निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर जो कि काम की तलाश में गाँव से शहर की ओर आते है, जो लेबार चौक पर बैठ कर काम मिलने का इतंजार करते है और काम न मिलने पर मायूस होकर घर वापस चले जाते है।
बेरोजगारी के कारण श्रमिकों की आर्थिक स्थिति चितंनीय होती जा रही है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के तुलाराम शर्मा व पिंकी जैन, अभिषेक सारास्वत, मुकेश बघेल, सुनीता कुमारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम 8 सूत्रीय मांग पत्र उत्तर प्रदेश के मा0 उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सौंपा।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण मौजूद संगठन के अध्यक्ष का ज्ञापन लिया और उनकी बातों को भी गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस ज्ञापन पर उचित कार्रवाई की जाएगी जिससे मजदूरों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके।
उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन ने उठाई यह मांग
- प्रत्येक लेवर चोक पर निर्माण श्रमिको के बैठने व पीने के शुद्ध पानी व्यवस्था की जाये।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर मिनी सचिवालय बनाया जाये और विधिवत रूप से संचालित किये जाये,प्रत्येक मिनी सचिवालय पर श्रमिको का डाटा संग्रह किया जाये जिससे विभिन्न सरकारी योजनाओ का लाभ ग्राम स्तर पर व समय से मिल सकेगा।
- कार्यस्थल पर श्रमिकों की स्वास्थ्य, सुरक्षा व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाये।
- श्रमिक महिलाओं को कौशल विकास से जोडने के लिये कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना की जाये और महिला श्रमिकों के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिये निर्माण क्षेत्र की कंपनीयों को प्रेरित किया जाये।
- श्रमिक परिवारों के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडा जाये।
- प्रत्येक श्रमिक परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाये.
- असंगठित क्षेत्र के मजदूरो को न्यूनतम वेतन कम से कम 600 रू प्रति दिन व 18000 मासिक किया जाये।
- नियमित रोजगार गारण्टी योजना लागू की जाये जिससे श्रमिको को नियमित रोजगार मिल सके।