आगरा। सिविल सोसायटी ने उठाए कार्यवाहक कुलपति पर सवाल। आरोप, पूर्व कुलपति ने एडीए का नक्शा बिना पास कराए करोड़ों के निर्माण। बैंक के साथ मिलकर जीपीएफ में भी किया घपला।
सिविल सोसायटी ने आगरा विवि में फैल रहीं अव्यवस्थाओं और नियुक्तियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में सिविल सोसायटी के राजीव सक्सेना, शिरोमणि सिंह और अनिल शर्मा ने आरोप लगाए कि विवि में कार्यवाहक कुलपति ने स्थायी नियुक्तियां कर दीं। जबकि वह ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कार्यवाहक कुलपति द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की नियुक्ति का विज्ञापन No. RW/01/2022 05 May, 2022 को दिया गया था। यह जानते हुए भी कि कार्यवाहक कुलपति स्थाई नियुक्तियां नहीं कर सकता है। इस Notification/ Advertisement No. RW/01/2022 05 May, 2022 में रोस्टर का गलत इस्तेमाल किया गया। कार्यवाहक कुलपति ने अपने खास लोगों को नियुक्त करने के लिये पदों में भारी हेरफेर किया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
डॉ. पाठक पर लगाए आरोप
सोसायटी ने कहा, यहां बता दें कि पूर्व कुलपति डा. अशोक मित्तल को गलत नियुक्तियों के कारण जिस जांच समिति ने हटाया था, कार्यवाहक कुलपति डा. पाठक उसके सदस्य थे। अब डा. पाठक खुद कार्यवाहक कुलपति बनकर इस विश्वविद्यालय में आ गये हैं और नियुक्तियों का खेल कर रहे हैं।
एक साल बाद भी नहीं मिले पूर्णकालिक कुलपति
सोसायटी ने कहा, हमारी जानकारी के अनुसार OSD महोदय की जांच पूरी तरह प्रभावित एवं निष्पक्षता से परे है। प्रदेश की पुरानी यूनिवर्सिटी में शुमार आगरा विश्वविद्यालय को चांसलर / कुलाधिपति / राज्यपाल एक वर्ष का समय बीतने के बाद भी पूर्णकालिक कुलपति देने में असमर्थ हैं।

विवि एक्ट से चलता है
उन्होंने कहा, हम नहीं जानते कि जांच रिपोर्ट किस रूप में पेश की जाएगी। किन्तु यह तय है की इसमें पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति पर कोई बात नहीं होगी। ना ही कार्यवाहक कुलपति के प्रशासनिक निर्णय निरस्त होंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एक्ट से चलता है। अफसरों की मनमानी से नहीं।
पूर्व कुलपति ने बिना अनुमति करवाए निर्माण
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व कुलपति डा. अरविंद दीक्षित ने बिना एडीए से नक्शा पास करवाये कई सौ करोड़ के अनुपयोगी निर्माण करवाये। पैसे की बर्बादी की। तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति डा. पाठक ने पूर्व कुलपति को बचाने के लिये सब निर्माणों को बिना अनुमति के खोल दिया। इस निर्माण से जुड़े यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए।
इंडियन बैंक ने ब्याज का बड़ा घपला किया
सोसायटी ने कहा कि विश्वविद्यालय करोड़ों रुपये अवैध बिल्डिंग निर्माण पर खर्च करा है। पर कर्मचारियों के जनरल प्रोविडेंट फंड पर यूनिवर्सिटी और इंडियन बैंक ने ब्याज का बड़ा घपला किया है। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतनों से काटी जाने वाली राशियों को लेकर संशय की स्तिथि अस्पष्ट है। जीपीएफ पर कर्मचारियों को साधारण ब्याज मिल रहा है, ना कि जीपीएफ का 8% चक्रवर्ती ब्याज। यूनिवर्सिटी सभी कर्मचारियों को जीपीएफ की पुस्तिका जारी करने और पिछला सारा ब्याज देने पर भी कोई जांच या निर्णय नहीं होगा।
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