हिंदू-मुस्लिम फसाद को रोकता है ये अली-बली चौराहा

एक और पूरे देश में ज्यादातर समय तक हिंदू मुस्लिम दंगों की खबरें हमें सुनने को मिलती रहती है लेकिन आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र में एक ऐसी जगह है जो हिंदू मुस्लिम एकता की शांति और सौहार्द कि मिसाल बन चुकी है। वो है अली बली चौराहा!

एत्मादपुर के सवाई गांव के निकट एक चौराहे पर सिर्फ 15 फीट की दूरी पर एक और वीर बजरंगबली का मंदिर है वहीं दूसरी ओर मोहम्मद जलाउद्दीन अली की मजार है। यह चौराहा करीब दो दर्जन गांवों को एक दूसरे से जोड़ता है एत्मादपुर से 3 किमी दूर बरहन मुख्य मार्ग पर स्थित यह दोनों मंदिर व मजार एत्मादपुर क्षेत्र में अपनी ख्याति के लिए प्रसिद्ध हैं।

इस स्थान की अधिक जानकारी के लिए जब मून ब्रेकिंग की टीम वहां पहुंची तो हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी इन दोनों मंदिर और मजार के इतिहास का पता लगाना क्योंकि हमने जब वहां मौजूद आसपास के ग्रामीणों से इनके इतिहास के बारे में पूछा तो वह बताने में असमर्थ दिखे। लेकिन थोड़ी देर रुकने के बाद हमें एक व्यक्ति दिखाई दिए जो मंदिर में पूजा-अर्चना काफी देर से कर रहे थे। उन्होंने बताया की उनका नाम लाला सत्यप्रकाश है और उन्हीं के पूर्वजों ने मजार और मंदिर का निर्माण कराया है। उनका कहना था कि यह उस समय की बात है जब देश हिंदू मुस्लिम तुष्टिकरण की आग में जल रहा था और पाकिस्तान और भारत के बंटवारे का वक्त था लाला सत्यप्रकाश ने बताया कि यहां उनके पूर्वज सन 1972 मैं ईटों का भट्टा चलाते थे ।जो के ताजमहल के प्रदूषण जोन में आने के कारण अब बंद हो चुका है तो उस भट्टे पर काम करने वाले मजदूर पास ही में एक मिट्टी के मस्जिद की पूजा किया करते थे उन मजदूरों का मानना था कि यह एक मजार है जो स्वत ही उत्पन्न हुई है तू मजदूरों की आस्था का सम्मान करते हुए लारा सत्यप्रकाश के पिताजी ने उस जगह पर एक छोटी सी मजार का निर्माण कराया। लेकिन कुछ स्थानीय लोगों ने लाला के कार्य का विरोध किया और कहने लगे कि हिंदू होकर एक मस्जिद का निर्माण करा रहे हो तो इसी कुंठा में लाला ने रास्ते के दूसरी तरफ सन 1984 के आसपास वीर बजरंग बली की प्रतिमा की स्थापना की जिसके बाद उसी में भगवान शंकर की शिवलिंग को परिवार सहित विराजमान किया गया।

दरअसल हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी के मंदिर पर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का आयोजन किया जाता है तथा वहीं हर गुरुवार को सैयद जलाउद्दीन अली की इस मस्जिद पर हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग अगरबत्ती जलाकर अपना मत्था टेककर दुआएं मांगते हैं। जब भी मुस्लिम त्योहार या उर्स के मौके पर कव्वाली का आयोजन किया जाता है तो यह आयोजन हनुमान मंदिर के पीछे वाले मैदान पर होता है। लोग इस जगह को लेकर मान्यता इतनी है कि लोगों का मानना है इस जगह के कारण ही इस क्षेत्र में आज तक हिंदू मुस्लिम फसाद जैसा कोई भी लड़ाई दंगा नहीं हुआ है।

हनुमान जयंती के मौके पर शनिवार को अखंड रामायण के पाठ व हवन में शामिल होने आए वरिष्ठ भाजपा नेता व खंदौली ब्लाक प्रमुख जगबीर सिंह तोमर का कहना था कि इस चौराहे का नाम इन दोनों मंदिर और मस्जिद की वजह से ही अली बलि चौराहा रखा गया है। दोनों धर्मस्थल अपनी-अपनी जगह अपने अनुयायियों के दिल में एक बड़ा और गहरा रिश्ता रखते हैं इसी का कारण है कि यह जगह हिंदू मुस्लिम सांप्रदायिकता मैं सौहार्द का प्रतीक बना हुआ है। श्री तोमर ने बताया कि यह मंदिर और सैयद दोनों ही बहुत ही प्राचीन समय से यहां विद्यमान है और कई वर्षो से यहां के स्थानीय निवासी बड़े ही प्रेम और सद्भावना के साथ इनकी पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं।

एत्मादपुर से दीपक बघेल के साथ पवन शर्मा की रिपोर्ट

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