लाल पत्थर छीन रहा है महिलाओं का सुहाग

आगरा। करवाचौथ त्यौहार का इंतजार हर सुहागिन बड़ी बेसब्री से होता है। पुराणों में जिक्र है की इस व्रत को रखने से सुहागिनों का सुहाग सुरक्षित रहता है और ऐसी कथाये भी है लेकिन आगरा जिले में एक गांव ऐसा भी है जहां करवाचौथ त्यौहार पर भी सुहागिन के घरों पर के साथ ही पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। शुभ-घड़ी में महिलाएं चांद का दीदार कर पति की लम्बी उम्र की कामनाये करती है लेकिन आगरा जिले के इस कुकरसा गाँव में सिलीकोसिस बीमारी के कारण 35 वर्ष की आयु में ही पुरुष की मौत हो जाती है यह गांव आगरा के तांतपुर में है।

तांतपुर का यह गांव राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है और यह पत्थर खदानों में पत्थर का काम सबसे ज्यादा होता है छोटा हो या फिर बड़ा हर कोई अपने जीवन यापन के लिए पत्थर खदानों में काम करते हुए दिखाई देता है जिसके कारण मजदूरो को सिलिकोसिस की बीमारी हो जाती है और कम उम्र में ही महिलाये विधवा हो जाती है लेकिन आगरा के इस गांव में करवाचौथ पर कुछ लग ही नज़ारा है जिन महिलाओं के पति जीवत हैं, वे तो व्रत की तैयारी कर रही हैं,लेकिन इसके बावजूद भी यह सुहागिन मायूस है और उनके आस-पड़ोस की महिलाएं जब उन्हें ये व्रत करते हुए देखती हैं, तो अपनी भाग्य को कोसती हैं । यहां की रहने वाली एक महिला ने बताया कि उनके पति की मृत्यु इस बीमारी की वजह से 5 वर्ष पूर्व हो गई थी । पति-पत्नी के इस पावन त्यौहार पर उनकी याद आती है, लेकिन दर्द को बच्चों का चेहरा देखकर छिपा लेते हैं । वहीं गांव की ही कांता देवी का कहना था कि पत्थर खदान के इस काम ने सुहाग छीन लिया, अब महिलाएं परिवार चलाने के लिए इस काम को कर रही हैं, तो उनकी जान पर भी इस बीमारी का साया मडरा रहा है ।

गांव में घुसते ही सूनी गलियाॅ दिखाई देती है । कुछ महिलाए गांव के चबूतरे पर बैठी हुईं मिल सकती है । उजड़ी हुई मांग और चेहरे पर उनकी पीड़ा को साफतौर पर पढ़ा जा सकता है । दर्द था, जीवन साथी के न होने का । महिलाओं से जब इस पूरे मामले में बात की गई तो उनका दर्द आंसू बनकर छलक पड़ा । बताया गया कि गांव में ये श्राप है या बीमारी का प्रकोप 35 से 40 वर्ष की उम्र में महिलाएं विधवा हो जाती हैं । हैरत की बात ये थी कि इस गांव की आबादी लगभग 1200 की है, जिसमें से 200 से अधिक महिलाएं विधवा हो चुकी है

उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष पंडित तुलाराम शर्मा ने बताया कि ये श्राप नहीं, बल्कि जानलेवा बीमारी सिलिकोसिस है । पत्थर की खदान का काम करने वाले युवाओं को ये बीमारी अपनी चपेट में लेती है । धीरे-धीरे फैलने वाली ये बीमारी शरीर को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देती है । इसके लिए राजस्थान में सिलिकोसिस बोर्ड बनाया गया है, लेकिन यूपी के इन मजदूरों के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, इसके चलते ये श्रमिक अकाल ही मौत के मुंह में समा रहे हैं ।

फ़िलहाल आज इस गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और सुहागिन महिलाये करवाचौथ पर अपने पति की लम्बी आयु के लिए अपने पति से पत्थर खदान में काम न करने का वचन लेने की बात कह रही हैं।

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