बेटे के इलाज़ को एक दिन की छुट्टी मांगना सिपाही को पड़ा भारी, हुआ निलंबित

आगरा। कहते हैं कि दुनिया में औलाद से बढ़कर कुछ नहीं होता लेकिन एक बाप के लिए औलाद उसकी नौकरी पर भारी पड़ गई। जी हां 3 महीने के बेटे के इलाज के लिए 1 दिन की छुट्टी मांगना ट्रैफिक पुलिस के सिपाही को भारी पड़ गया। छुट्टी मांगने के दौरान यातायात प्रभारी से कहा सुनी हो गई जिसके बाद जिले के पुलिस कप्तान ने बिना जांच किए ही सिपाही को निलंबित कर दिया।

दरअसल मामला एटा का है। यहाँ ट्रैफिक पुलिस में तैनात रामनरेश नाम के सिपाही के बेटे की तबियत पिछले 15 दिनों से काफी खराब थी जिसको लेकर वह आए दिन डॉक्टर के पास जा रहा था। आराम ना मिलने के कारण उसे आगरा डॉक्टर को दिखाना था जिसके लिए उसने ट्रैफिक प्रभारी से 1 दिन की छुट्टी मांगी थी लेकिन यातायात प्रभारी का दिल नहीं पसीजा और सिपाही को झूठा बहाना बनाकर छुट्टी मांगने का आरोप लगाया, जिस को लेकर सिपाही के यातायात प्रभारी से कहा सुनी हो गई। यातायात प्रभारी की शिकायत पर जिले के पुलिस कप्तान ने मामले की बिना जांच किए ही सिपाही को निलंबित कर दिया।

अपने निलंबन की चिंता किए बगैर यह सिपाही आगरा के एक डॉक्टर के पास अपने बेटे का इलाज कराने आया इसी दौरान मीडिया से मुलाकात होने पर पीड़ित सिपाही ने बताया कि उसे अकारण ही निलंबित किया गया है। वह तो अपने मासूम बेटे के लिए 1 दिन की छुट्टी मांगने गया था लेकिन छुट्टी के बदले उसे निलंबित कर दिया गया। निलंबन के विरोध में जब उसकी पत्नी और नेत्रहीन मां पुलिस कप्तान से मिली तब भी जिले के कप्तान का दिल नहीं पसीजा और उन्हें कप्तान ने भगा दिया आप भी सुनिए पीड़ित सिपाही और उसकी पत्नी का दर्द।

जिस तरह से जिले एटा जिले के पुलिस कप्तान ने संवेदनहीनता का परिचय दिया है यकीनन उसे सही नहीं कहा जा सकता। पीड़ित सिपाही अपने अधिकारियों से बस एक ही सवाल पूछ रहा है कि एक बेटे का पिता होना गुनाह है जिसके इलाज के लिए उसे 1 दिन भी नहीं दिया गया।

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