सैकड़ों सालों में पहली बार कैलाश मंदिर पर नहीं लगा सावन का भव्य मेला, द्वार से ही लौटे भक्त

आगरा। सैकडों वर्षों में यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि सिकंदरा स्थित कैलाश मंदिर पर सावन माह के तीसरे सोमवार को मंदिर पर आयोजित होने वाले भव्य मेले का आयोजन नहीं हुआ है। मंदिर के पट बंद है तो कैलाश मंदिर तक मार्ग भी सुनसान पड़ा हुआ है। मंदिर पर भक्तों की जगह सिर्फ पुलिस ही पुलिस नजर आ रही है। सावन माह के दूसरे सोमवार को शिव भक्तों द्वारा शिव के प्राचीन शिव मंदिर राजेश्वर महादेव, बिल्केश्वर महादेव, कैलाश महादेव और पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर की परिक्रमा लगाई जाती है। यह शिव मंदिर शहर के चारों कोनों में स्थित है और ये परिक्रमा पूरी रात चलती है। लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते इस बार यह धार्मिक आयोजन पूरी तरह से रद्द कर दिए गए। सावन माह के तीसरे सोमवार को कैलाश मंदिर पर भक्तों की भीड़ न उमड़ पड़े इसलिए पुलिस व प्रशासन ने एक दिन पहले ही मंदिर पर पुलिस बल तैनात कर दिया साथ ही मंदिर के बाहर मुख्य मार्ग पर बेरिकेडिंग भी कर दी गयी। जो भी भक्त कैलाश मंदिर पहुँच रहा था उसे पुलिस समझा बुझा कर वापस घर भेज रही थी। सोमवार को पुलिस के अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और मंदिर के महंत से भी वार्ता की।

सिकंदरा स्थित कैलाश महादेव मंदिर का इतिहास पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना बताया जाता है। मंदिर में एक साथ दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा संयोग दुलर्भ ही मिलता है। मंदिर के मठ महंत महेश गिरि के मुताबिक, यह शिवलिंग भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमद्गिनी के द्वारा स्थापित किए गए थे।

मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान् विष्णु के छठवें अवतार भगवान् परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि की कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उनसे अपने साथ चलने और हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांग लिया। इसके बाद भगवान शिव ने दोनों पिता-पुत्र को एक-एक शिवलिंग भेंट स्वरुप दिया। भगवान शिव ने इन शिवलिंगों को जहाँ रखे जाने पर वहीं स्थापित होने का वरदान दिया। इस पर दोनों शिवलिंगों को लेकर रेणुका धाम आश्रम चल दिये लेकिन रात्रि विश्राम को सिकंदरा यमुना किनारे इस स्थान पर रुके। सुबह दोनों पिता-पुत्र ने नित्य कर्म किये। इसके बाद ज्योर्तिलिंगों की पूजा करने के लिए पहुंचे, तो दोनों जुड़वा ज्योर्तिलिंग वहीं स्थापित हो गए।

मंदिर के महंत का कहना है कि सैकड़ो साल में यह पहली बार देखने को मिला है कि जब सावन माह में शिव भक्त कैलाश महादेव मंदिर पहुँचे अपने आराध्य के दर्शन नहीं कर पाए है और मंदिर पर मेले का भी आयोजन नही हुआ है। यह धर्मिक आयोजन कोरोना संक्रमण के चलते रद्द हुए है। कोरोना संक्रमण के कारण जिला प्रशासन ने मंदिरों के पट बंद रखने और धार्मिक आयोजन न होने का फैसला लिया है। प्रशासन के इस आदेश का पालन कराया जा रहा है जो भी भक्त मंदिर आ रहे है उन्हें समझा कर घर में ही विधि विधान से भगवान शिव की पूजा करने के लिए कहा जा रहा है। महंत द्वारा कैलाश महादेव की पूजा अर्चना विधि विधान से की जा रही है और इस पूरी पूजा और आरती को कैलाश मंदिर की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जा रहा है। अगर कोई भक्त कैलाश महादेव के दर्शन करना चाहते है तो वो मंदिर की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन दर्शन कर सकते है।

इस दौरान मंदिर के महंत ने भक्तों से अपील की है कि इस समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे, मास्क लगाकर रहे जिससे कोरोना संक्रमण से बच सके और पूजा घर पर ही करे।

कैलाश महादेव मंदिर के अलावा अन्य राजेश्वर महादेव मंदिर, बिल्केश्वर महादेव मंदिर, रावली और पृथ्वीनाथ मंदिर पर भी यही स्थिति देखने को मिली है, यहां पर भी भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और जो लोग मंदिर पूजा करने के लिए आ रहे हैं उन्हें समझा-बुझाकर घर वापस भेजा जा रहा है।

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