Home agra समस्याओं से जूझ रहे किसानों का जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर फूटा आक्रोश

समस्याओं से जूझ रहे किसानों का जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर फूटा आक्रोश

by admin

Agra. भारतीय किसान यूनियन के नेता और समर्थक राजनेताओं की ओर से कोई सुनवाई न किए जाने से पहले से ही नाराज था लेकिन अब स्थानीय प्रशासन भी उनकी मांगों को लेकर कोई सुनवाई नहीं कर रहा है। जिसे लेकर किसानों में रोष व्याप्त हो गया। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सभी किसान एकत्रित हुए और प्रतापपुरा चौराहे पर जमकर नारेबाजी करने लगे। जैसे ही किसानों ने माइक से नारा लगाया ‘गली गली शोर है, राजनेता चोर है।’ यह सुनते ही आम लोगों की भीड़ भी जुटने लगी।

किसानों की समस्या जानकर वह भी किसानों के साथ हो चले और कहने लगे कि राजनेता तो ऐसे ही होते हैं। वोट लेने के समय उनका चोला कुछ और होता है लेकिन जीतने के बाद वह कुछ और बन जाते हैं। लगभग 20 मिनट तक प्रदर्शन होने के बाद किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिला मुख्यालय की ओर कूच कर दिया।

भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों का कहना था कि चकबंदी के नाम पर किसानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इसीलिए चकबंदी प्रक्रिया को बंद किया जाना चाहिए। आगरा के 15 ब्लॉक जो डार्क जोन में चले गए हैं वहां पेयजल की किल्लत बनी हुई है। इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है जबकि किसान लगातार मांग करते चले आ रहे हैं कि डाउन हिस्ट्री में बैराज का निर्माण कर दिया जाए लेकिन इस और भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आवारा गोवंश की समस्या किसी से छुपी नहीं हुई है। सरकार ने नाम के लिए गौशाला है तो बना दी लेकिन आवारा गोवंश को पकड़कर उनमें रखा नहीं जा रहा है क्योंकि गौशाला में आवारा गोवंश को चारा देने की भी व्यवस्था है नहीं है।

किसानों ने यह भी कहा कि इस समय उन्हें विद्युत आपूर्ति की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। सरकार उन्हें 15 से 16 घंटे विद्युत आपूर्ति देने का वायदा किया था लेकिन इतनी विद्युत आपूर्ति नहीं दे पा रही है जिससे उनकी खेती में सिंचाई की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। किसानों ने बाह के एसडीएम को लेकर भी अपना आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना था कि एसडीएम बाह किसानों का उत्पीड़न कर रहे हैं। इसीलिए जिला अधिकारी को उनका तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण कर देना चाहिए

इस प्रदर्शन के दौरान किसानों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर इस बार उनके ज्ञापन पर सुनवाई नहीं हुई। सरकार और स्थानीय प्रशासन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो यह आंदोलन और ज्यादा उग्र हो जाएगा।

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