फतेहपुर सीकरी चेयरमैन और सभासद सहित 6 के ख़िलाफ़ दर्ज़ हुआ मुकदमा, जाने मामला

आगरा। फतेहपुर सीकरी चेयरमैन त्रिलोक चंद और सभासद मनीषा सहित छह के खिलाफ गंभीर धाराओं में थाना फतेहपुर सीकरी में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा धोखाधड़ी व फर्जी दस्तावेज के मामले में किया गया है। न्यायालय के आदेश पर फतेहपुर सीकरी थाने में धारा 120 B, 471, 468, 467, 419 के तहत मुकद्दमा दर्ज होने के बाद पुलिस अब मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। यह मुकदमा क्षेत्र के ही एक किताब विक्रेता की ओर से दर्ज कराया गया है।

पीड़ित ने बताया कि वह स्टेशनरी की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। पीड़ित किताब विक्रेता पुनीत कुमार जैसवाल ने पिछले दिनों पुलिस से डाक के माध्यम से नामजद शिकायत की थी कि उसके रिश्तेदार फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी दादी का मरणोपरांत रुपया हड़पना चाहते हैं जिसके लिए उन्होंने धोखाधड़ी भी की है लेकिन उस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जिसके बाद पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय के निर्देश पर फतेहपुर सीकरी चेयरमैन त्रिलोक चंद और सभासद मनीषा सहित छह के खिलाफ गंभीर धाराओं में थाना फतेहपुर सीकरी में मुकदमा दर्ज़ कराया।

पीड़ित ने बताया कि उसके दादा-दादी का देहांत हो गया है। दादा के स्वर्गवास के बाद उसके पिता सरयू कुमार, चाचा हरिओम कुमार, ऋषि कुमार, वेदप्रकाश व वीरेंद्र को छोड़ा था। इसी बीच पिता सरयू कुमार का भी 20 अप्रैल 2015 स्वर्गवास हो गया और 6 मई 2017 को उनकी दादी का देहांत हो गया। दादी के देहांत के बाद दादा की संपत्ति में पिता सरयू की मृत्यु के बाद वह खुद चाचा हरिओम कुमार, ऋषि कुमार, वेदप्रकाश व वीरेंद्र के साथ वारिसान हक में शामिल है।

पीड़ित ने बताया कि स्व. दादी ओमवती का बैंक एकाउंट सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में था। इसी बीच स्व. दादी के बैंक बैलेंस को हड़पने के लिए चाचा वीरेंद्र कुमार और चाची दीप्ति ने योजनाबद्ध तरीके से नगरपालिका फतेहपुर सीकरी अध्यक्ष त्रिलोक चंद मित्तल व सभासद मनीषा के सहयोग से उनके हस्ताक्षर युक्त परिजन प्रमाण पत्र तैयार कर लिया जिसमें प्रार्थी ने खुद को इकलौता परिजन दर्शाया ताकि मृतक दारी के बैंक खाते की पूरी रकम अकेले हड़प सके। फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बाद आरोपी चाचा वीरेंद्र कुमार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक के समक्ष दादी ओमवती के बैंक बैलेंस को लेने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। बैंक अधिकारियों ने जांच की गई तो पता चला कि कुछ तथ्यों को छुपाया गया है और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किये गए है लेकिन इसके बावजूद भी शाखा प्रबंधक ने इसकी शिकायत नहीं की और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई वैधानिक कार्यवाही की गयी।

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