बाल श्रम कराने वाले दुकानदारों के ख़िलाफ़ चला अभियान, 16 बच्चों को मुक्त कराया गया

मथुरा। कम मजदूरी देने के चलते बच्चों से बालश्रम कराने वालों पर मथुरा पुलिस और श्रम विभाग का डंडा लगातार चल रहा है। “नो चाइल्ड लेबर” अभियान के अन्तर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मथुरा के निर्देशन में गठित टीम के द्वारा बालश्रम मुक्ति अभियान चलाया गया। इस अभियान में पुलिस, श्रम विभाग के अधिकारी और चाइल्ड लाइन के पदाधिकारी मौजूद रहे। टीम द्वारा भूतेश्वर तिराहा, डीग गेट, बंगाली कॉलोनी, गोवर्धन चौराहा और सौंख रोड स्थित मार्केट आदि जगह पर छापामार कार्यवाही को अंजाम दिया और इस क्षेत्र से 16 बाल श्रमिक को मुक्त कराया गया। इस दौरान श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा बाल श्रम करा रहे दुकान मालिकों के विरूद्ध बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम संशोधित 2016 के तहत तहत कार्यवाही भी की। यह सभी बच्चे कपड़े की दुकान, मोटरसाइकिल रिपेयरिंग सेन्टर, मोबाईल रिपेयरिंग और भगवान की पोशाक बनाने के कारखाने आदि पर कार्य कर रहे थे।

इस कार्यवाही के बाद टीम द्वारा कानूनी कार्यवाही के साथ-साथ लोगों को बालश्रम कानून के बारे में जागरूक भी किया गया और प्रतिष्ठान स्वामियों को भविष्य में किसी भी बच्चे से बाल श्रम न करवाने के लिए निर्देशित किया जिससे उन बच्चों का बचपन खराब न हो और वे शिक्षा ग्रहण कर सके।

AHTU उप निरीक्षक सुरेन्द्र भाटी ने बताया कि बाल श्रम जैसे गम्भीर मुद्दे को लेकर शासन एवं प्रशासन बहुत ही गंभीर है जिसके चलते आज नो चाइल्ड लेबर अभियान चलाकर कार्यवाही की गई। सुरेंद्र भाटी ने बताया कि सितम्बर में पूरे माह बाल श्रम के विरूद्ध अभियान चलाया जाएगा ताकि बाल श्रम जैसी समस्या को जनपद से खत्म किया जा सके।

चाइल्ड लाइन कोर्डिनेटर नरेन्द्र परिहार ने बताया कि बच्चों से बात करने पर पता चला कि वह सुबह लगभग 09 बजे दुकान पर आते है और रात 8.00 के बाद अपने घर जाते है। इसके लिए उन्हें 4000 से 4500 प्रतिमाह की तनख्वाह भी मिलती है। कुछ बच्चों ने बताया कि कोरोना के चलते उनके घर की आर्थिक स्थिति खराब है और उनके स्कूल भी बन्द है। अतः उनके द्वारा परिवार को सहयोग करने हेतु कार्य किया जा रहा है। चाइल्ड लाइन द्वारा उक्त सभी बच्चों की सूचना बाल कल्याण समिति को दी जाएगी, उन्हें सरकार द्वारा बालहित में चलाई जा रही योजना से भी जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्याम सुंदर और डेविड जॉन ने संयुक्त रूप से बताया कि 14 वर्ष के बच्चों का कार्य करना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। जबकि 14 वर्ष से अधिक के बच्चों को कुछ नियमों के तहत कार्य करने की छुट दी गयी है। आज 14 वर्ष से अधिक के बच्चे दुकानों पर काम करते हुए मिले लेकिन नियम का पालन न करने पर दुकान मालिकों के विरुद्ध कार्यवाही की गई है।

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