आगरा। चारा कांड, राफेल कांड के बाद अब आगरा में एक नया घड़ी कांड सामने आया है। मामला सदर थाने से जुड़ा है। सदर थाने में गबन और दस्तावेजों की हेराफेरी के साथ साथ धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज हुआ। मुकदमे में नामजद लोगों से पुलिस की डीलिंग होती है। डीलिंग में पुलिस पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने के साथ मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए प्रयास करती है।
मुकदमे में आरोपियों को बार-बार सदर थाने बुलाया जाता है। तत्कालीन इंस्पेक्टर सदर नवरत्न गौतम, उनके कारखास और दरोगा कृपानंदन शर्मा द्वारा मुकदमे में आरोपियों से पांच लाख रुपए की रिश्वत मांगी जाती है और जब आरोपी रिश्वत देने में असमर्थता जताता है तो फिर पुलिस का इमान चंद रुपयों में फिसल जाता है। यानी तत्कालीन इंस्पेक्टर नवरत्न गौतम, दरोगा कृपानंदन शर्मा कारखास शंभू पांडे और अन्य पुलिसकर्मी थाने पर मौजूद मुकदमे के आरोपी के हाथ में मौजूद विदेशी ब्रांडेड घड़ी को उतरवा लेते हैं।
इस बात की शिकायत पीड़ित तत्कालीन एसपी सिटी कुंवर अनुपम सिंह से लिखित में करता है। बकायदा तत्कालीन एसपी सिटी कुँवर अनुपम सिंह जांच कराते हैं और जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर सदर नवरत्न गौतम, वर्तमान सदर थाने के इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार कारखास सिपाही शंभू पांडे और दरोगा कृपा नंदन शर्मा को आरोपी ठहराया जाता है और यह जांच रिपोर्ट जिले के पुलिस कप्तान के पास में जाती है। जिसमें जिले के पुलिस कप्तान लिखित में घड़ी वापस करने का आदेश भी करते हैं।
अब देखिए इस खबर में मजेदार बात। पुलिस पीड़ित की घड़ी तो वापस कर देती है मगर अभी तक उन पुलिसकर्मियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई जिन लोगों ने 5 लाख रूपए की रिश्वत मांगी।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में भ्रष्टाचार फैलाया और जिन लोगों को एसपी सिटी की जांच में दोषी पाया गया। यानी नियत साफ है। पुलिस, पुलिस को बचाने के लिए मशक्कत कर रही है। घड़ी वापस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। साथ ही साथ एसएसपी आगरा का वह आदेश जिसमें घड़ी वापस करने का तत्काल ऑर्डर किया गया।
सवाल फिर वही व सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद अब पुलिस विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। पर क्या उन पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही होगी जिसमें तत्कालीन एसपी सिटी कुंवर अनुपम सिंह ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाया है।