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बेटी को आजाद कराने के लिए धरने पर बैठा दंपति, प्रशासन ने बाल आयोग के आदेश को भी नहीं माना

by admin

Agra. ‘कोई मेरी बेटी को कैसे भी आजाद करा दो, कोई तो मेरी बेटी को मुझ से मिलवा दो’ कुछ इस तरह की ही गुहार एक पीड़ित दंपत्ति जिला मुख्यालय में लगा रहा था जो अपनी बेटी को वापस पाने के लिए धरने पर बैठा हुआ है लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है क्या है।

एक साल से भटक रहा दंपति

लावारिश नवजात को एक महिला 8 वर्ष से बेटी की तरह पाल रही है। एक किन्नर की शिकायत पर बच्ची बाल गृह में निरुद्ध है। बच्ची को भले ही महिला ने अपनी कोख से जन्म नहीं दिया लेकिन उसे अपने बच्चों से ज्यादा प्यार दिया है। पालनहार मां अपनी बच्ची को वापस पाने के लिए डीएम से गुहार लगा रही है कि उसकी बेटी बाल गृह में कैद है उसे आजाद करा दो।

ये है पूरा मामला

टेढ़ी बगिया निवासी एक महिला जो पालनहार मां के घर पर 8 साल पहले यानी 28 नवंबर 2014 को फर्रुखाबाद का एक किन्नर नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया। महिला ने किन्नर से मना किया कि उसके पास पहले से दो बेटे और बेटी हैं। इस वह बोला तो कहीं फेंक देना। यह सुनकर और नवजात को देखकर महिला का दिल पसीज गया। उसने नहला धुलाकर उसे रख लिया। जब वह थोड़ी बड़ी हुई तो उसका कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला करा दिया। बेहतर परवरिश के बीच की स्कूल में पढ़ाई चल रही थी। पूरा परिवार बालिका के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ गया।

किन्नर की बिगड़ गई नीयत

महिला का आरोप है कि पिछले वर्ष अक्टूबर माह में जब वह घर नहीं थी। तभी वही किन्नर जो बच्ची को छोड़कर गया था। वह बच्ची को घुमाने के बहाने घर से ले गया। उसके बाद बच्ची को वापस नहीं दे रहा था। इस मामले में फर्रुखाबाद पुलिस तथा चाइल्ड लाइन के हस्तक्षेप पर बच्ची को बरामद किया गया।

किन्नर ने की शिकायत

पीड़िता ने बताया कि बाल कल्याण समिति ने उन्हें बच्ची सुपुर्द की। इसके बाद वर्ष 2021 से पालनहार मां हर 15 दिन बाद बाल कल्याण समिति के सामने बच्ची के साथ पेश होती है। बच्ची को प्यार-दुलार के साथ रखने से समिति भी संतुष्ट थी लेकिन 17 अगस्त 2022 को बाल कल्याण समिति ने बच्ची को महिला के साथ बुलाया और उसे बाल गृह में रख लिया। जब मां ने बेटी को मांगा तो बाल कल्याण समिति संरक्षण अधिकारी बाल संरक्षण इकाई की रिपोर्ट के आधार पर मना कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि महिला बालिका का पालन पोषण करने में सक्षम नहीं है।

डीएम को दिखाए दस्तावेज

पालनहार मां का दर्द देखकर चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट नरेश पारस भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने डीएम से बच्ची से जुड़े दस्तावेज दिखाए, जिनमें जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वैक्सीनेशन कार्ड, स्कूल का प्रमाण पत्र, बाल कल्याण समिति के आदेश आदि शामिल थे। उन्होंने डीएम से अनुरोध किया है कि बाल कल्याण समिति के आदेश से बच्ची पर मानसिक नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

जिला मुख्यालय के लगा रही चक्कर

मां मीना ने बताया अब बच्ची को हमसे मिलने भी नहीं दिया जाता है। हम लोग 11 बार DM से व्यक्तिगत तौर पर मिल चुके हैं, पत्र भी दिए हैं, अपील भी की है। जिला प्रोविजनल अधिकारी, विधायक धर्मपाल, महिला बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य सभी के पास पत्र भेजे चुके हैं, लेकिन कोई भी साथ नहीं दे रहा है वहीं बेटी भी मां-बाप की याद में बाल गृह में रोती रहती है। उसे उनकी खूब याद आती है।

बाल आयोग के आदेश हवा हवाई

इस पूरे मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविटी नरेश पारस का कहना है कि इस संबंध में यूपी बाल आयोग सीडब्ल्यूसी को निर्देशित कर चुका है कि बच्चे को इस दंपत्ति को सौंप दिया जाए लेकिन सीडब्ल्यूसी के कुछ मतभेद सामने आ रहे हैं जिसके चलते यह बेटी वापस नहीं मिल पा रही है। सीडब्ल्यूसी क्या चाहता है यह समझ में नहीं आ रहा है। हर किसी के आदेश को दरकिनार किया जा रहा है। फिलहाल दंपत्ति अपनी बेटी को वापस पाने के लिए आज जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठ गया है।

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