Agra. एडीए ने एडीए हाइट्स के फ्लैट्स 90 वर्ष की लीज पर बेचे हैं। मल्टी स्टोरी कॉम्प्लेक्स के फ्लैट्स जो कई वायदों के साथ बेचे गए थे लेकिन एडीए के वायदे आज तक पूरे नहीं हुए और 8 साल में कॉम्पलेक्स का हाल बुरा हो गया है। टावर्स में सीलन की वजह से बिल्डिंगों का बुरे हाल हैं और जर्जर की स्थिति हो गयी है। एडीए हाइट्स के फ्लैट्स के अन्दर भी यही स्थिति बनी हुई है। फ्लैट्स के अंदर दीमक का प्रकोप भी है। कॉम्प्लेक्स और फ्लैट्स घटिया सामग्री से तैयार किये गए हैं जिसकी पोल अब खुल रही है। इस कारण फ्लैट खरीदने वाले लोग काफी परेशान है और जर्जर फ्लैट्स के चलते लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। काम्प्लेक्स का मेंटेनेंस एडीए के पास है। पिछले 8 साल से रखरखाव के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। एडीए की इस कार्य प्रणाली से फ्लैट स्वामी ठगा महसूस कर रहे हैं।
एडीए के इस काम्प्लेक्स का भ्रमण कर के बिल्डिंग और काम्प्लेक्स कि 8 सालों में हुई दुर्दशा साफ दिखाई देती है। बिल्डिंग के कॉलम में क्रैक, प्लास्टर गिरने से लोहे कि छड दिखना, उसी तरह बीम में भी लोहे कि छड दिखना, आरसीसी की छत पर प्लास्टर गिरने से बीम में क्रैक और छड दिखना, ओवरहेड पानी की टंकी से पानी लीक होना, छत की दीवार पर क्रैक, पानी की पाइप के टूटने से पानी का रिसाव, कई जगह से ग्रेनाइट पत्थर टूटना जैसी कई और समस्याओं से आप सीधे रूबरू हो सकते है। इन समस्याओं को देख आप समझ सकते हैं कि जिस एजेंसी द्वारा एडीए हाइट्स का निर्माण किया गया है उसने कितनी निम्न स्तर की घटिया सामग्री प्रयोग में लाई है। इस बिल्डिंग और काम्प्लेक्स निर्माण में किस तरह का भ्रष्टाचार हुआ है यह खुद इसका गवाह बना हुआ है।
पिछले 8 सालों में एडीए के कई उपाध्यक्ष को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। एडीए ने सिर्फ वायदे किये और कुछ भी नहीं हुआ। अभी तक विभिन्न टावर्स के कम्पलीशन सर्टिफिकेट भी बिल्डर ने नहीं दिए हैं। जल्द ही समस्याओं का निस्तारण नही हुआ तो कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
एडीए जो की आगरा शहर में भवन निर्माण में सरकार के मानकों लॉ और बाइलॉज को पूरी तरह कार्यान्वयन कराने के लिए है, वह खुद अपने मल्टी स्टोरी काम्प्लेक्स में उन मानकों की धज़ियाँ उड़ा रहा है, जो ग़ैरक़ानूनी है। इसका जवाब देने से अधिकारी कतरा रहे हैं। वही निर्माण एजेंसी भी अब घटिया निर्माण के चलते विवादों में घिरती जा रही है, यदि निर्माण कार्य की जांच हुई तो बड़ा घोटाला खुल सकता है।
फ्लैट ओनर्स समिति ने अपनी वेदना बताते हुए कहा कि एडीए जो कि सरकार के अधीन संस्था होने के नाते गुणवत्ता और सही मानकों के तहत प्लेट बना कर देगी। इस विश्वास के साथ उन्होंने फ्लैट्स खरीदे थे लेकिन यहां तो एडीए के अधिकारी और निर्माण एजेंसी ने फ्लैट स्वामियों के साथ बड़ा धोखा कर दिया जिसका खामियाजा आज एडीए हाइट में रहने वाले फ्लैट्स स्वामी भुगत रहे है। ऐसा नहीं पिछले 8 साल में आगरा विकास प्राधिकरण में बैठने वाले उपाध्यक्षों को एडीए हाइट्स में हुई गड़बड़ी की जानकारी नहीं हो लेकिन सभी उपाध्यक्ष इन समस्याओं को नजरअंदाज करके अपना कार्यकाल पूरा कर गए जबकि एडीए हाइट्स में रहने वाले फ्लैट स्वामियों की स्थिति दिन प्रतिदिन डरावनी होती जा रही है। वह हर वक्त डरे हुए माहौल में रहने को विवश हैं।
अब देखना होगा कि एडीए हाइट में रहने वाले फ्लैट स्वामियों की समस्या का निदान कब तक होता है, फिलहाल आगरा विकास प्राधिकरण में अब सिर्फ फ्लैट स्वामियों को सख्त कार्यप्रणाली से कार्य कर रहे उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र पैसिया से ही न्याय की उम्मीद है।