सड़ रहा सब्जियों का राजा, सरकार से खफा किसान

आगरा, एत्माद्पुर। केन्द्र में बीजेपी की सरकार बनने से पहले वादे किए गए थे कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। किसानों को उनकी फसलों का सही दाम दिलाया जाएगा, लेकिन पूरे देश में जगह-जगह किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। आज किसानों ने सड़कों पर आलू फेंक कर अपना विरोध प्रदर्शित किया। किसानों का कहना है सरकार ने वादे किए थे, लेकिन वादे पूरे ना होने से तमाम किसान परेशान हैं। किसानों का आलू अब सड़ने की कगार पर है और आलू का वाजिब दाम भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए केंद्र की नीतियां जिम्मेदार हैं और सरकार अपने वादे भी नहीं निभा रही है।

किसान पूरे साल धूप, सर्दी व बरसात में मेहनत करता है और अपनी फसल के लिए रात दिन एक करता है, लेकिन जब फसल तैयार हो जाती है तो किसानों के पास ऐसा कोई बाजार नहीं है, जहां उसकी फसल का सही दाम मिल सके। प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि देश के प्रधानमंत्री नें आलू को किसानों से वाजिब दामों पर खरीदने और अच्छा मुनाफा साझा करने का वादा किया है, लेकिन हकीकत में माजरा उल्टा ही है। न तो आलू खरीदने के लिए केन्द्र बनाए गए हैं और न ही किसानों की फसल के वाजिव दाम मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों का आलू सड़ने लगा है। इसके चलते किसानो को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

यही कारण है कि एत्मादपुर तहसील के खंदौली के गांव उस्मानपुर के खेतों में किसानों ने सैकड़ो बोरी आलू खेतों में फेंक दिया है। किसानों का कहना है कि वे जब आलू को मंडी में लेकर पहुचे तो 10 रुपये प्रति बोरी की रेट सुनकर लौट आये क्योकि ये तो मजदूरी के बराबर के दाम भी नही थे और मजबूरन खेतो में फेंकने पड़े।

ऐसे में सवाल उठता है कि सबको साथ लेकर चलने वाली सरकार किसानों के क्या कर रही है। क्यो अभी इन किसानों के लिए कोई निर्णय नही लिया गया जिससे किसान को उनकी फसल का उचित मूल्य मिल पाता।

एतमादपुर से पवन शर्मा की रिपोर्ट।

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