आगरा। मुरेंडा गांव में तड़के सुबह अफरा तफरी मच गई जब ग्रामीणों ने 3.5 फुट लंबा और 30 किलोग्राम वज़न का सॉफ्टशेल कछुआ देखा। इस कछुए को देखकर ग्रामीण इधर उधर भागने लगे। तभी इस कछुए पर कुत्तो ने हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वाइल्डलाइफ एसओएस टीम को दी। सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम मौके पर पहुँच गयी और इस विशाल कछुए को रेस्क्यू किया।
सुबह सैर पर निकले भूपेंद्र सिंह ने बताया कि एक विशाल कछुआ सुबह के समय गांव की रोड पर देखा गया जिस पर कुत्ते भोंक रहे थे। यह देखकर तुरंत कुत्तो को तुरंत वहाँ से भगाया गया और वाइल्डलाइफ एसओएस को तुरंत इसकी सूचना दी गयी जिस पर बाद 2 सदस्यी टीम तुरंत पहुँच गयी और कछुए को रेस्क्यू किया। मेडिकल परीक्षण के बाद 30 किलोग्राम वज़न वाले सॉफ्टशेल टर्टल को यमुना नदी में वापस छोड़ दिया गया।
वाइल्डलाइफ एसओएस के बैजुराज एम.वी ने बताया कि कछुआ काफी बड़ा था, लगभग 3.5 फुट लंबा और 30 किलो वजन। सॉफ्टशेल कछुए नदी एवं तलाब को साफ रखने में सहायता करते हैं क्योंकि खाने के लिए यह ज़्यादातर मरे हुए पानी के जानवर एवं पानी के पौधे ही ढूंढते हैं।
सह-संस्थापक एवं सीईओ, वाइल्डलाइफ एसओएस कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि इस बात को लेकर खुशी है कि लोग अब वन्यजीवों को लेकर सतर्क हो रहे हैं और उन्हें पीड़ा में देख हमारी एक्सपर्ट टीम को रेस्क्यू के लिए कॉल करते हैं। सॉफ्टशेल कछुए ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने मीट और चाइनीज़ दवाइयों के लिए शिकारियों द्वारा मार दिए जाते हैं। सॉफ्टशेल कछुए भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत शिड्यूल 1 में आते हैं, मतलब बाघ और सॉफ्टशेल कछुए एक ही समान सुरक्षित प्रजाति हैं।