Home आगरा झोलाछाप से इलाज़ कराकर हो गया एड्स रोग, बचने को जागरूकता है जरूरी

झोलाछाप से इलाज़ कराकर हो गया एड्स रोग, बचने को जागरूकता है जरूरी

by admin
AIDS attacks the immune system, timely treatment is necessary

आगरा। 50 वर्षीय कानपुर निवासी राजू (बदला हुआ नाम) आगरा में रिक्शा चालक हैं। 2014 में उन्हें पता चला कि वह एचआईवी पॉजिटिव हैं। उन्होंने बताया कि वह हर तरह से सावधानी बरतते हैं, लेकिन एक बार उन्होंने अपना दांत एक झोलाछाप डॉक्टर से निकलवाया। राजू आशंका जताते हैं कि शायद डॉक्टर ने संक्रमित सुई लगाई, जिससे वह एचआईवी पॉजिटिव (एड्स रोगी) हो गए। अब राजू हर माह एआरटी सेंटर से दवाएं लेकर नियमित दवाएं खा रहे हैं और वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

जिला क्षय रोग अधिकारी व जनपद में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल डॉ. सीएल यादव ने बताया कि एचआईवी/एड्स किसी को छूने से नहीं फैलता है। जनपद में इसकी रोकथाम के लिए कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत विभाग द्वारा चेतना सेवा संस्थान के सहयोग से गंतव्य प्रवासी व ट्रक चालकों को जागरुक करना व उनकी स्क्रीनिंग करके उनकी जांच करने का कार्य किया जा रहा है।

संस्था के परियोजना निदेशक रईस अहमद ने बताया कि बाहर से आकर काम करने वाले लोग व ट्रक चलाने वाले लोगों को एचआईवी/एड्स की दृष्टि से उच्च जोखिम की स्थिति में रखा गया है। ऐसे में संस्था द्वारा दोनों ही वर्गों को एचआईवी/एड्स के बारे में संपूर्ण जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही उन्हें इससे बचाव के बारे में बताया जाता है, जिससे कि उनमें एचआईवी/एड्स से बचाव की समझ विकसित हो।

संस्था की परियोजना प्रबंधक तृप्ति जैन ने बताया कि संस्था द्वारा प्रवासी मजदूरों व ट्रक चालकों को उपलब्ध समय के हिसाब से जागरुकता कार्यक्रम व स्वास्थ्य शिविरों का संचालन करके उनकी स्क्रीनिंग की जाती है। डॉक्टर द्वारा स्क्रीनिंग के बाद जरूरत होने पर एचआईवी/एड्स की जांच की जाती है। यदि कोई पॉजिटिव आता है तो एक बार दोबारा जांच कराकर एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) केंद्र पर पंजीकरण कराकर उनका उपचार शुरू कराया जाता है।

तृप्ति ने बताया कि जनपद में अप्रैल 2019 से लेकर मार्च 2022 तक 43227 प्रवासी मजदूरों को एचआईवी/एड्स के प्रति जागरुक किया गया है। इनमें से 16888 मरीजों का पंजीकरण करके काउंसलिंग व डॉक्टर द्वारा चेकअप किया गया। इसके साथ ही 7086 प्रवासी मजदूरों की एचआईवी की जांच की गई है।

ट्रक चालक सुनील ने बताया कि उन्होंने जागरुकता शिविरों में भाग लिया है। पहले उन्हें एड्स व एचआईवी को लेकर इतनी समझ नहीं थी। लेकिन अब उन्हें पता चल गया है कि यह स्त्री और पुरुष दोनों को हो सकता है। अप्राकृतिक संबंध बनाने पर एचआईवी/एड्स होने का खतरा रहता है। संयम बरतकर, जीवनसाथी के प्रति वफादारी निभाकर, कंडोम उपयोग करके व समय-समय पर अपनी जांच कराकर इस खतरनाक रोग को रोका जा सकता है।

ऐसे फैलता है एचआईवी

  • एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
  • संक्रमित सुई लगवाने या रक्त उत्पाद चढ़ाने से।
  • नशीली दवाओं को सुई से लेने से।

ऐसे करें बचाव

  • असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें।
  • कंडोम का उपयोग करें।
  • संक्रमित सुई न लगवाएं।
  • जीवनसाथी के साथ वफादारी निभाएं।
  • हमेशा सरकारी या पंजीकृत ब्लड बैंक से ही रक्त लें।
  • रक्त लेते वक्त सुनिश्ति करें कि यह एचआईवी मुक्त है।

इन तरीकों से नहीं फैलता एचआईवी

  • एचाईवी सामाजिक एवं सामान्य मेलजोल से नहीं फैलता है।
  • हाथ मिलाने से नहीं फैलता है।
  • एक साथ घर में रहने से नहीं फैलता है।
  • कपड़ों का आदान-प्रदान करने से नहीं फैलता है।
  • शौचालय अथवा स्वीमिंग पूल साझा करने से नहीं फैलता है।
  • साथ खाने से नहीं फैलता है।
  • मच्छर या कीड़े-मकोड़ के काटने से नहीं फैलता है।

Related Articles

Leave a Comment

%d bloggers like this: