बरसाना की होली में पहुंचे योगी-खट्टर, बृज क्षेत्र को दी कई सौगात

मथुरा। बरसाने की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ खेली गई। राधा रानी का रूप धरे गोपियों ने नंदगांव के हुरियारों पर जमकर लाठियां बरसाई। हंसी ठिठोली, गाली अबीर-गुलाल और लाठियों से खेली गई होली का देश विदेश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने जमकर आनंद उठाया। ब्रज की होली में भाग लेने के लिए प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और उनके साथ प्रदेश के कई केबिनेट मंत्री पहुंचे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने होली के झंडे में गांठ लगाकर विश्व प्रसिद्ध लठमार होली के कार्यक्रम की शुरुआत की और सभी को होली की बधाई दी। इस अवसर पर हरियाणा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी समस्त देशवासियों को होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ब्रज के किसानों के लिए वह हरियाणा सरकार की तरफ से हथनीकुंड से पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करवाएंगे।

उद्घाटन सत्र के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने ब्रज क्षेत्र को 100 करोड़ रुपए की सौगात दी और मथुरा, बरसाना, नंदगांव और गोकुल को तीर्थ स्थल घोषित कर दिया

वहीं दूसरी ओर बरसाना की लट्ठमार होली में हुरियारिन और हुरियारों के बीच होली की जमकर ठिठोली देखने को मिली। बताते चलें कि नंदगांव के कृष्ण रूपी हुरियारे जोकि बरसाना में राधा रूपी गोपियों के साथ होली खेलने आते हैं, हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत ये हुरियारे पीली पोखर पर आते हैं जहां उनका स्वागत बरसाना के लोग ठंडाई और भांग से करते हैं। यहां से यह हुरियारे रंगीली गली पहुंचते हैं जहां बरसाना की हुरियारिन को होली के गीत गाकर रिझाते हैं। होली के गीत और गालियों के बाद होता है नाच गाना और फिर खेली जाती है लट्ठमार होली जिसमें बरसाना की हुरियारिन नंद गांव के हुरियारों पर करती है लाठियों से बरसात। इस बचाव में लाठियों से बचाव में सभी हुरियारे ढाल से अपना बचाव करते हैं।

इस होली को खेलने के लिए नंद गांव से बूढ़े, जवान और बच्चे भी आते हैं। बरसाना की अनोखी लट्ठमार होली को देखने के लिए देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु राधा और कृष्ण की प्रेम स्वरूप होली को देख कर आनंदित होते हैं और खुद भी इस होली का हिस्सा बनकर जमकर लुत्फ उठाते हैं।

ब्रज में 40 दिन तक चलने वाले इस होली में जब तक बरसाना की हुरियारिन नंद गांव के हुरियारों पर लाठियों से होली नहीं खेलती तब तक होली का आनंद नहीं आता। कहा जाता है कि इस होली को देखने के लिए स्वयं देवता भी स्वर्ग से धरती पर आते हैं।

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