प्रवासी श्रमिकों की इस समस्या को लेकर किया गया वर्कशॉप का आयोजन

आगरा। देश मे बेरोजगारी का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जिसके कारण कभी मजदूरो को काम है तो कभी नही। मजदूर अपने परिवार के भरण पोषण के लिए के एजेंटो के माध्यम से विदेशों में नौकरी और मजदूरी के लिए चले जाते है लेकिन वहां इन मजदूरो और श्रमिको की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं होती है। वहां इनकी सुनने वाला कोई नहीं है। प्रवासी श्रमिकों की इस समस्या को लेकर बीडब्लू आई की ओर से एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया जिसका विषय नेशनल नेटवर्क मीटिंग ऑन इंटरनेशनल माइग्रेसन था। जिस पर बीडब्लूआई और श्रमिक संघठनो के
पदाधिकारियों ने अपने अपने विचार रखे।

 श्रमिको को लेकर यह वर्कशॉप फतेहाबाद रोड स्थित होटल गंगारतन में हुई। इस कार्यशाला का उद्घटान उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष पंडित तुलाराम शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस वर्कशॉप में बीडब्लूआई साउथ ऐशिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक विदेशों में काम कर रहे हैं। विदेशी कंपनियां इन श्रमिकों को अनुबंध के तहत अपने साथ काम कराती हैं, लेकिन विदेशों में इनकी चिंता करने वाला कोई नहीं है। इन श्रमिको का कोई बीमा नही होता है और इनके लिए उचित व्यवस्थायें भी नही होती है। उन्होंने उदाहरण के रूप में इस बैठक में दो श्रमिकों से भी रूबरू कराया। जिन्होंने अपना दर्द सभी के सामने व्यक्त किया। ये दोनों श्रमिक राजस्थान के रहने वाले हैं। एक का नाम है जगदीश प्रसाद, जिसने कतर में करीब 7 वर्ष कार्य किया, वहीं दूसरे का नाम प्रकाश चंद जिसने ईराक में काम किया। ये दोनों भारतीय विदेशों में बुरी तरह फंसे रहे जिनकी चिंता करने वाला कोई नही था यह दोनो को बीडब्लूआई की पहल पर अपने देश वापस आ सके।


इस वर्कशॉप में बीडब्लूआई साउथ ऐशिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. राजीव शर्मा ने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय श्रमिक विदेशों में काम कर रहे हैं। विदेशी कंपनियां इन श्रमिकों को अनुबंध के तहत अपने साथ काम कराती हैं, लेकिन विदेशों में इनकी चिंता करने वाला कोई नहीं है। इन श्रमिको का कोई बीमा नही होता है और इनके लिए उचित व्यवस्थायें भी नही होती है। उन्होंने उदाहरण के रूप में इस बैठक में दो श्रमिकों से भी रूबरू कराया। जिन्होंने अपना दर्द सभी के सामने व्यक्त किया। ये दोनों श्रमिक राजस्थान के रहने वाले हैं। एक का नाम है जगदीश प्रसाद, जिसने कतर में करीब 7 वर्ष कार्य किया, वहीं दूसरे का नाम प्रकाश चंद जिसने ईराक में काम किया। ये दोनों भारतीय विदेशों में बुरी तरह फंसे रहे जिनकी चिंता करने वाला कोई नही था यह दोनो को बीडब्लूआई की पहल पर अपने देश वापस आ सके।


अपना दर्द बताते हुए जगदीश प्रसाद ने बताया कि कतर में पहले दो वर्ष तक सब ठीक था लेकिन उसके जो उत्पीड़न शुरू हो गया। वेतन के साथ साथ समय से खाना भी नही मिलता था। जानवरों की तरह जिदंगी हो गई थी। वहां की पुलिस भी सुनवाई नहीं कर रही थी। कंपनी ने पासपोर्ट जमा करा लिया था। बिना पैसे और पासपोर्ट के वहां से आते भी तो कैसे। वहीं प्रकाश चंद ने बताया ईराक में भी कुछ ऐसा ही हाल था। एयरपोर्ट पर 48 घंटे बिना कुछ खाये पीये बैठा रहा। इसके बाद जब वहां कंपनी में पहुंचे, तो न रहने की उचित व्यवस्था थी और नाहीं खाने की। इसलिए किसी तरह बीडब्लूआई से संपर्क किया। बीडब्लूआई के एशिया पैसिफिक के उपाध्यक्ष आरसी खुंटया ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज्य के सहयोग से वहां फंसे 143 भारतीयों को भारत वापस बुला लिया।

विदेशों में कार्य करने वाले इन भारतीय श्रमिकों के अधिकारों, स्वास्थ्य, बीमा आदि को लेकर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें माइग्रेसन पर अभियान को बड़ा रूप कैसे दिया जाए, इस पर भी चर्चा हुई। इस चर्चा में तमिलनाडुु के एनआरटी डिपार्टमेंट, ट्रेड यूनियन, एनजीओ, कनार्टक सरकार के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। इस वर्कशॉप में साफ तौर पर कहा गया कि माइग्रेसन के नाम पर जो भारतीय श्रमिकों से मोटी रकम वसूली जाती है, उस पर लगाम लगाई जाए। इसके साथ ही अभी तक जो पासपार्ट बनते हैं, उसमें दो प्रकार की व्यवस्थाएं हैं। उसमें एक है Emigration Check Not Required, और दूसरी है Emigration Check Required। ईसीआर पासपोर्ट में वो श्रमिक आते हैं, जो अशिक्षित होते हैं। ऐसे श्रमिकों का डाटा तो भारत सरकार के पास होता है, लेकिन ईसीएनआर वालों का डाटा सरकार के पास नहीं होता है। वर्तमान समय में ईसीएनआर पासपोर्ट अधिक बन रहे हैं। ईसीआर वाले सभी पासपोर्ट ईमाइग्रेट सिस्टम से रजिस्टर्ड हो जाते हैं। इसके साथ ही सरकार से मांग की गई, कि प्रवासी श्रमिकों के लिए जो 1983 में कानून बनाया गया था, उसे बदला जाए। क्योंकि आज समय और परिस्थितियां दोनों ही बदल चुकी हैं।

इस कार्यशाला उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा का कहना है कि सबसे पहले उन एजेंट पर लगाम लगे जो विदेशों में नौकरी का सुनहरा सपना दिखाकर गरीब श्रमिकों को लूटने का काम करते हैं। कोई अपनी जमीन बचेकर तो कोई रिश्तेदारों से कर्जा लेकर एजेंट को थमा देता है, इसके बाद विदेश में न चाहते हुए भी उसकी फंसने की मजबूरी बन जाती है। इसके साथ ही एक विदेशों में न्यूनतम मजदूरी भी तय होनी चाहिए, जिससे किसी भी श्रमिक का सोशण न हो सके।

इस दौरनसीता शर्मा आईएलओ, राजीव शर्मा बीडब्लूआई, प्रेरणा प्रसाद बीडब्लूआई, राम रतनम तमिलनाडू से, केरला से प्रिया एडवोकेट, गोपाल रेड्डी तमिलनाडु आदि मौजूद रहे।

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