लाउडस्पीकर बैन को लेकर क्या कहते हैं सभी धर्मों के धर्मगुरू, जानिए

आगरा। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर उतारने के सरकार के नियम पर अलग-अलग धर्मो के धर्मगुरूओ ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यवाई पर सवाल खड़े किये है और कहा है कि सरकार नियमनुसार कार्य करे। धर्म विशेष के खिलाफ कार्यवाई न की जाए। सिख समुदाय ने सरकार के इस नियम को मानने ने साफ़ इनकार किया है। उनका कहना है कि उनके धर्म स्थलों पर लगातार लाउडस्पीकर बजते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश में ध्वनि प्रदुषण के मामले में हाई कोर्ट के हस्तछेप के बाद बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजने पर राजनीति शुरू हो गयी है। राजनेता इस मुद्दे पर भी खुलकर राजनीति रोटिया सेक रहे है, तो उधर आगरा के अलग अलग धर्मो के धर्मगुरुओं ने भी सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये है। उनका कहना है कि सरकार बिना किसी भेदभाव के इस नियम को लागू करे लेकिन सिख समाज ने सरकार के इस नियम को मानने से साफ़ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उनके धर्म स्थलों पर ऐसे ही गुरुवाणी का पाठ होता रहेगा वो इस नियम का विरोध करेंगे।

आगरा के प्राचीन महादेव के मंदिर रावली की महंत और सेवकों का कहना है कि उनके यहाँ मंदिर में लाउडस्पीकर नहीं बजता। विशेष अवसर पर लाउडस्पीकर बजाने के लिए वो प्रशासनिक अधिकारियो से अनुमति लेकर आगे से लाउडस्पीकर मंदिर में लगाये जायेंगे।

आगरा के प्रतापपुरा स्थित प्रसिद्ध सेंट मेर्री चर्च के फादर ने भी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाने की सरकार की मंशा पर शक जाहिर करते हुए कहा कि सरकार को चाहिए कि इस नियम को निष्पक्षता से लागू करे। धर्म विशेष के खिलाफ इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर नियम लागू होता है तो सभी धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरने चाहिए। किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

आगरा की शाही जामा मस्जिद के इमाम ने सरकार द्वारा लागू कराये जा रहे इस नियम की खिलाफत करते हुए उन्होंने कहा कि ये गैर जरुरी बातों में सरकार लोगो को उलझा रही है। गरीबो और मजलूमों के हक में सरकार काम करे उनकी परेशानियों को सुलझाये। इस तरह की बातों में उलझा कर लोगों को बेवक़ूफ़ न बनाये। 

धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाने को लेकर आगरा के युवा भी नाखुश नजर आ रहे है। उनका कहना है कि ये तो गलत है ये वर्षो से होता आ रहा है और ये होना चाहिए मंदिर और मस्जिद के नाम पर लोगो को नहीं लड़ना चाहिए। आखिर लाउडस्पीकर से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है।

शासनादेश के बाद एडीएम सिटी ने भी आदेश को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ वार्ता शुरू कर दी है। एडीएम सिटी का कहना था कि धर्मगुरुओं के साथ बातचीत कर उच्च न्यायालय और शासनादेश से अवगत कराया जाएगा ताकि शहर में अमन और चैन बना रहे। जबकि एसपी सिटी का कहना था कि जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन आदेश को अमली जामा पहनाएंगे।

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