विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस पर विशेष

आगरा। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को रोकने के लिए 17 दिसंबर 1999 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से यह निर्णय लिया गया था कि पूरे विश्व में 25 नवंबर को विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाएगा। दिवस की घोषणा और उसे मनाने का उद्देश्य था कि महिलाओं के प्रति जिस तरह से पूरे विश्व में अत्याचार बढ़ रहे हैं उन अत्याचारों को रोका जा सके।

भले ही आज पूरे विश्व में यह दिवस मनाया जा रहा हो लेकिन अभी भी आधी आबादी कहीं भी सुरक्षित नहीं दिखाई देती। विश्व के साथ-साथ भारत की बात मानी जाए तो महिलाओं के प्रति लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। प्रत्येक 3 से 4 मिनट में महिला या बच्ची किसी घटिया सोच के व्यक्ति का शिकार हो रही है। सरकारों में गंभीरता नहीं दिखाई देती तो लोगों की सोच भी नहीं बदल पाई है।

क्यों मनाया जाता है विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस –

विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस की इतिहास भी महिलाओं के बलिदान से रंगा हुआ है। बताया जाता है कि 25 नवंबर, 1960 को डोमिनिक तानाशाह रैफेल ट्रुजिलो के आदेश पर तीन बहनों पैट्रिया मर्सिडीमिराबैल, मारिया अर्जेंटीना मिनेर्वा मिराबैल और एंटोनिया मारिया टेरेसा मिराबैल की हत्या कर दी गई थी क्योंकि इन तीनों बहनों ने ट्रुजिलो की तानाशाही का कड़ा विरोध किया था। महिला अधिकारों के समर्थक व कार्यकर्ता वर्ष 1981 से इस दिन को इन तीनों बहनों को श्रद्धांजलि देने के लिए विश्व महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में मनाते हैं।

समाजसेवी और सेंट जोन्स कॉलेज के हिंदी विभाग की एचओडी मधुरिमा शर्मा का कहना है कि महिलाओं के प्रति अपराध को रोकने के लिए सरकार और सामाजिक संगठन कार्य कर रहे हैं लेकिन उसके वाबजूद आधी अबाधी सुरक्षित नहीं है। विश्व में महिलाओं के प्रति अपराध का ग्राफ 35% है तो भारत में उसकी स्थिति और भी ज्यादा भयानक है। भारत में हर 5 मिनट में महिला युवती और बच्ची छेड़खानी या फिर हैवानियत की शिकार होती हैं।

समाजसेवी और कांग्रेस महिला नेत्री पदमा अग्रवाल का कहना है कि दशको से हम इस दिवस को मनाते आ रहे है लेकिन फिर भी हम पुरुषो की मानसिकता नहीं बदल पाये है। समाज में ऐसे लोग है जो आज भी महिला या फिर युवती को सिर्फ खेलने की चीज समझते है इसलिये तो अपनी वासना को शांत करने के लिए उसकी जिंदगी बर्बाद करने से भी नहीं चूकतेे है। ऐसे लोगो को सरकार ऐसी सजा दे जो समाज के लिए मिशाल पेश करे।

महिलाओ का कहना है कि आज हम समाज में महिलाओं की कितनी भी सुरक्षा और सम्मान देने की बात कर लें लेकिन आधी आबादी आज भी सुरक्षित नहीं है। कुछ महिलाएँ और युवती आत्मरक्षा के लिए कदम उठा रही है लेकिन वो भी नाकाफी है।

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