ताज महल में आरती करने वाली महिलाओं पर मुकदमा दर्ज

आगरा। ताज महल की शाही मस्जिद में नमाज किये जाने के विरोध में हिंदूवादी संघठनो की ओर से ताजमहल के अंदर की गई आरती का मामला फिर गरमाने लगा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) विभाग की ओर से ताजगंज थाने में अज्ञात तीन महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है जिसमें आरोप है कि तीनों महिलाओं ने विश्व धरोहर और प्राचीन इमारत में एक नई परंपरा शुरू करने का प्रयास किया, जो सही नहीं है।

ताजमहल में तीन महिलाओं की ओर से पूजा पाठ किये जाने का वीडियो पिछले दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था,जिसके बाद से एएसआई,और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक, अधीक्षण पुरातत्वविद्, सीआईएसएफ के कमांडेंट और एडीएम सिटी सहित तमाम अन्य संबंधित विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई और सीआईएसफ की एसआई की ओर से ताजगंज थाने में तहरीर दी गई. जिस पर एफआईआर दर्ज हुई है. एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार का कहना है कि किसी भी प्राचीन और विश्व धरोहर इमारत में कोई नई परंपरा शुरू करना कानूनन गलत है. 
ताजगंज थाने में पुलिस ने एफआईआरआई दर्ज करने के बाद सीसीटीवी फुटेज और वीडियो के आधार पर आरोपी तीनों महिलाओं की तलाश शुरू कर दी है।

शनिवार को हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय बजरंग दल की महिला शाखा के अध्यक्ष मीना दिवाकर अपनी दो अन्य महिलाओं के साथ ताजमहल में पहुंची। ताजमहल की शाही मस्जिद में पहले गंगाजल से फर्श और दीवार को साफ किया और उसके बाद फिर धूप और अगरबत्ती लगाकर भगवान शिव की आराधना की जिसका वीडियो भी वायरल हुआ जिसमे मीना दिवाकर का दावा है कि वह घर से पानी की बोतल में गंगाजल लेकर गई थी. 

मीना दिवाकर ने ताजमहल में आरती करने और पूजा पाठ करने की बात उजागर की थी और वीडियो भी मीडिया को दिया था। इसके बाद जब एएसआई से इस बारे में बात की तो सुरक्षा के नाम पर ठीकरा सीआईएसफ के सिर फोड़ दिया। एएसआई और सीआईएसफ एक दूसरे के बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ताजमहल पढ़ी जाने वाली नमाज और आरती को लेकर कार्यवाही की बात कहकर बात टाल रहे थे।

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