Home देश-विदेश धरती से आज टकराएगा सौर तूफ़ान, बिजली गुल के साथ इंटरनेट हो जाएगा बंद! जानें क्या है इसकी सच्चाई

धरती से आज टकराएगा सौर तूफ़ान, बिजली गुल के साथ इंटरनेट हो जाएगा बंद! जानें क्या है इसकी सच्चाई

by admin
Solar storm will hit the earth today, internet will be shut down with power failure! Know what is its truth
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धरती पर आज सौर तूफान टकरा सकता है। हर बार ये खबर आती है कि सौर तूफान से इंटरनेट बंद हो जाएगा, बिजली गुल हो जाएगी लेकिन इस बार अगर सौर तूफान धरती से टकराएगा तो ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। क्योंकि यह तूफान मध्यम दर्जे का है। हां, एक बात हो सकती है कि उत्तरी गोलार्द्ध के ऊपरी हिस्से वाले देशों को सौर तूफान की वजह से आसमान में इंद्रधनुषी रंग देखने को मिल सकते हैं। यानी नॉर्दन लाइट्स का नजारा देखने को मिल सकता है।

अमेरिकन नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के मुताबिक, एक मध्यम दर्जे का जियोमैग्नेटिक तूफान धरती से टकराने वाला है। इसकी वजह से ऊंचाई पर मौजूद पावर ग्रिड्स और कुछ सैटेलाइट्स पर मामूली असर आ सकता है लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसा बेहद दुर्लभ होता है। हालांकि उत्तरी ध्रुव और उसके आसपास के देशों में लोगों नॉर्दन लाइट्स यानी अरोरा बोरियेलिस देखने को मिल सकता है।

NOAA के मुताबिक यह जी2 स्तर का सौर तूफान है। जी1 तूफान बेहद हल्का और जी5 तूफान सबसे खतरनाक होता है। इसलिए यह कम स्तर का सौर तूफान है। इससे धरती पर किसी तरह के नुकसान की आशंका नहीं है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी चेतावनी जारी की जाती है ताकि सौर तूफान के रास्ते में आने वाले सैटेलाइट्स और पावर ग्रिड को संचालित करने वाले देश या एजेंसी सतर्क हो जाएं।

यह तूफान उस सोलर फ्लेयर की वजह से आ रहा है, जिसे वैज्ञानिकों ने शनिवार को देखा था। सूरज की तरफ से धरती की ओर कोरोनल मास इजेक्शन हुआ था जिससे यह जियोमैग्नेटिक तूफान उठा है। NOAA ने कहा है कि उंचाई वाले स्थानों पर मौजूद पावर ग्रिड्स में वोल्टेज कम-ज्यादा हो सकता है या फिर ट्रांसफॉर्मर शॉर्ट सर्किट हो सकता है। लेकिन यह तभी होगा जब तूफान ज्यादा देर तक टिका रहे।

NOAA ने दुनियाभर के देशों को निजी कंपनियों को अपने सैटेलाइट्स को सुरक्षित कक्षा में डालने को कह दिया है, ताकि तूफान का असर उनपर या उनके द्वारा दी जा रही सेवाओं पर न पड़े। नॉर्दन लाइट्स का नजारा तब देखने को मिलता है जब सौर तूफान के कण धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। इनकी टकराहट में धरती का वायुमंडल भी साथ देता है जिससे हमें आसमान में कई रंगों के बदलाव देखने को मिलते हैं।

दुनियाभर के वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा डर ये है कि हमारे पास सौर तूफान और उससे पड़ने वाले असर को लेकर डेटा बहुत कम है। इसलिए हम ये अंदाजा नहीं लगा सकते कि नुकसान कितना बड़ा होगा। दुनिया में सबसे भयावह सौर तूफान 1859, 1921 और 1989 में आए थे। इनकी वजह से कई देशों में बिजली सप्लाई बाधित हुई थी, ग्रिड्स फेल हो गए थे, कई राज्य घंटों तक अंधेरे में थे।

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