ये देखिए बकरा गाड़ी, जानिए कैसे बकरे निभा रहे बेटे का फ़र्ज़

आगरा। आपने घोड़ा गाड़ी देखी होगी, ऊंट गाड़ी देखी होगी, बैलगाड़ी देखी होगी, रेलगाड़ी देखी होगी लेकिन क्या आपने बकरा गाड़ी देखी है। सुनने में अटपटा लगता होगा लेकिन वास्तव में हम किसी कहानी के प्रसंग की बात नही कर रहे है बल्कि बकरा गाड़ी की ही बात कर रहे है। आगरा के ताजगंज क्षेत्र में यह अनूठी गाड़ी देखने को मिली है।

एक ठेल को तीन बकरे खींचकर ले जा रहे थे और उस पर सवार एक बुजुर्ग व्यक्ति इस बकरा गाड़ी को हाक रहा था। इस बकरा गाड़ी को देखकर हमसे रहा नही गया और हमने उस गाड़ी को रोककर उसके मालिक से इस गाड़ी की जानकारी जुटा ही ली। इस बकरा गाड़ी को ताजगंज के नगला मेवाती निवासी हमीद ने बनाई है। बुजुर्ग हमीद अपनी रोजी रोटी के लिए ठेल लगाते थे लेकिन वृद्धावस्था में जब ठेल खींचने की ताकत नही रही तो इन बेजुबानों का साथ लिया। इनके सहयोग से बकरा गाड़ी बनाई और उस पर सामान रखकर शहर में जगह जगह बेचने लगे।

व्यक्ति की ढलती उम्र में जब उसकी औलाद उसका साथ छोड़ देती है और वो दर दर भटकता है ऐसे समय में आगरा में बेजुवान जानवर बकरों की ऐसी बानगी देखने को मिली है जो अपने मालिक के वृद्धावस्था में पहुँचने पर उसका सहारा और उसकी ताकत बने हुए है। यह बेज़ुबान बकरे प्रतिदिन अपने मालिक की गाड़ी को खींचकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं।

हमीद का कहना है कि यह बकरे नहीं बल्कि मेरे जीवन का सहारा हैं। यह मेरे बिना रह नहीं सकते। मेरे घर पर न होने पर यह भूखे न रहे इसलिए में इन्हें अपने साथ ले जाता हूँ। यह मेरे लिए जानवर नही बल्कि मेरे बेटे है जो इस अवस्था में मेरा पूरा साथ दे रहे हैं।

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