13 छात्र नेताओं के प्रवेश प्रतिबंध पर एनएसयूआई-सछास आगरा विवि के ख़िलाफ़ खोलेंगे मोर्चा

आगरा। आगरा विश्वविद्यालय में भी राजनीति गरमाने लगी है। शनिवार को आगरा विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों के आमने सामने आ जाने से हुए विवाद के बाद आगरा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 13 छात्र नेताओं के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिनमे एनएसयूआई के आठ और समाजवादी छात्र सभा के 5 छात्र नेता शामिल है जबकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कोई भी छात्र नेता इसमें शामिल नहीं किया गया है जिससे इन छात्र संगठनों ने विवि प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को लेकर एनएसयूआई और सपा छात्र सभा के छात्र नेता में रोष व्याप्त है और विवि प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी की जा रही है। छात्र संगठनों के छात्र नेताओं का कहना है कि इसके खिलाफ और डीएम को ज्ञापन देंगे। उधर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन छात्र नेताओं को छात्र मानने से इंकार कर दिया। विश्व विद्यालय प्रशासन का कहना है कि यदि यह छात्र है तो इसके साक्ष्य प्रस्तुत करें।

आपको बताते चलें कि शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में एबीवीपी के प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी और एनएसयूआई व सपा छात्र सभा के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए थे। दोनों ओर से विवाद बढ़ता देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को 13 छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष समेत छात्र नेताओं की सूची जारी कर उन पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन यह प्रतिबंध विवि प्रशासन ने केवल एनएसयूआई और सपा छात्र सभा के छात्र नेताओं पर ही लगाया है जिसके कारण विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति गरमाने लगी है और छात्र संगठन विवि प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

आगरा विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिन 13 छात्रों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है उसमें एनएसयूआई से गौरव शर्मा, सतीश सिकरवार, अंकुश गौतम, बिलाल अहमद,अपूर्व शर्मा, ललित त्यागी, हर्ष उपाध्याय, आशीष कुमार प्रिंस और समाजवादी छात्र सभा के रवि यादव, प्रभाकर जाधव, राजन ठाकुर, अमित प्रताप यादव और जयंत यादव शामिल हैं।

एनएसयूआई छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर तानाशाही रवैया अपना रहा है। यदि हंगामे के बाद सूची बनाई गई तो उसमें एबीवीपी के छात्र नेताओं के नाम क्यों शामिल नहीं किए गए हैं। वहीं सपा छात्र सभा के नेताओं का कहना है कि विवि प्रशासन ने सरकार के अधीन कार्य किया है। यदि कार्रवाई करनी थी तो तीनों छात्र संगठनों पर समान कार्रवाई होनी चाहिए थी फिर एबीवीपी को क्यों बचाया गया है। इसके खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।

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