शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ़ राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शुरू किया अभियान

आगरा। प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बार बार भ्रष्टाचार को रोकने की कोशिश करने के बावजूद तमाम सरकारी विभाग अभी भी पूरी तरह से भ्रष्टाचार की चपेट में है। इतना ही नहीं दिन-प्रतिदिन शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर शनिवार को विकास खंड बरौली अहीर आगरा में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षा विभाग के कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक संघर्ष करने के लिए सभी शिक्षकों एवं महासंघ के कार्यकर्ताओं और सदस्यों को निर्देशित किया गया।

शैक्षिक महासंघ की संगोष्ठी में उपस्थित हुए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की प्रदेश कार्यसमिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ देवी सिंह नरवार ने बताया भ्रष्टाचार के खिलाफ यह मुहिम जिसकी शुरुआत आगरा से की जा रही है। इसके पहले चरण में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के कार्यालयों में कार्यरत भ्रष्टाचार में संलिप्त शिक्षा अधिकारियों और लिपिकों को चिन्हित किया जाएगा। उनके विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर शासन में शिकायत दर्ज कराकर जांच कराई जाएगी।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि ने बताया पैक्ट से आपसी सहमति से सुविधा शुल्क के आधार पर कार्य करने की प्रचलित परंपरा को समाप्त करने के लिए भी संघर्ष किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने एक्ट, फैक्ट और पैक्ट समिति के गठन करने की घोषणा की। यह समिति लिपिकों और अधिकारियों के द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार का अध्ययन करेगी।

समारोह के विशिष्ट अतिथि महासंघ के प्राथमिक संवर्ग के मंडल के महामंत्री रमेश सिंह यादव ने भ्रष्टाचार मुक्त शिक्षा के लिए शिक्षकों को शोषण मुक्त करने पर जोर दिया।

संगोष्ठी में मुख्य रूप से आए हुए अतिथियों के साथ साथ विशिष्ट अतिथि माध्यमिक संवर्ग के जिला महामंत्री योगेंद्र, महा संघ के प्राथमिक संवर्ग के जिला अध्यक्ष मुकेश डागुर, पूर्व मंडल अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षक नेता चौधरी नेत्रपाल सिंह, महाराज सिंह सोलंकी, शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह छोंकर, अभय यादव, राजेश रावत, राजीव शर्मा, दिलावर सिंह, अर्चना भारती, प्रीति सिंह, हरीश चौहान, राकेश चाहर, योगेश ने विचार व्यक्त किए।

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