जानिये क्यों हो रही है गेम ऑफ़ अयोध्या फ़िल्म को रोकने की मांग

आगरा। 8 दिसंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही निर्देशक सुनील सिंह की फिल्म गेम ऑफ अयोध्या को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस फिल्म के निर्देशक सुनील सिंह को सेंसर बोर्ड की ओर से इस फिल्म को रिलीज करने की अनुमति भले ही मिल गई हो लेकिन इसके बावजूद भी इस फिल्म के कारण देश और शहर की फिजा खराब ना हो इसलिये लोग इस फ़िल्म के विरोध में खड़े हुए नजर आ रहे है।

गुरुवार को एनएसयूआई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एडीएम सिटी से मुलाकात की और इस फिल्म को शहर में रिलीज ना किये जाने की मांग को लेकर ज्ञापन भी दिया। इतना ही नहीं इस फिल्म के ट्रेलर को भी एडीएम सिटी को दिखाया गया जिससे एडीएम सिटी इस फिल्म की वास्तविकता से रुबरु हो सके।

इस फिल्म को रोकने की मांग कर रहे एनएसयूआई पदाधिकारियों का कहना था कि यह फिल्म सन 1992 में अयोध्या में हुए बाबरी विध्वंस और उसके कारण हुए हिन्दू मुस्लिम दंगों और इस बिच पनपी एक प्रेम कहानी को लेकर बनाई गयी है। इस प्रेम कहानी के साथ साथ फिल्म के कुछ डायलॉग और वास्तविक चित्रण हिंदू मुस्लिम भाइयों को एक बार फिर उसी दंगो की याद दिलाएगा जिससे हिन्दू मुस्लिम भाइयो के बीच दूरी बढ़ जायेगी। इस दंगो में जिन लोगों को घाव मिले थे एक बार फिर उनके घाव हरे हो जाएंगे और शहर की फिजा भी बिगड़ सकती है। एडीएम सिटी ने इस संबंध में पुलिस प्रशासन से बात कर उचित कारवाई कराने का आश्वासन दिया है। इस दौरान एनएसयूआई राष्ट्रीय महासचिव अमित सिंह, जिलाअध्यक्ष दीपक सिंह, शुंभम शर्मा, अपूर्वा शर्मा, ईसु जैन, के पी सिंह चंदेल, और सतेन्द्र दीक्षित मौजूद रहे।

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