अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : कुरीतियों से लड़ी डा.रचना, लगातार प्रयास से बदली जिले की तस्वीर

आगरा। गांव की रुढ़ीवादी कुरीतियों से महिलाएं घिरी थी। वह घर के चूल्हे-चौके तक ही सीमित थी। उन्हें बाहर की दुनिया से मतलब नहीं था। उनका परिवार भी बड़ा हो रहा था। सही खान-पान और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाने के चलते मातृ और शिशु मृत्यु दर में इजाफा हो रहा था। ऐसी ग्रामीण महिलाओं के लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डा.रचना गुप्ता अपने कार्यरत स्टाफ का क्षमता वर्धन कर काउन्सलिंग में निपुण बनाया। उन्होंने कॉपर टी प्रयोग करने को जागरूक किया। उनका प्रयास रंग लाया और आज ग्रामीण महिलाएं परिवार नियोजन के साधन को अपनाने लगी। यही वजह है कि सूबे में आइयूसीडी में आगरा ने पहला स्थान पाया। परिवार नियोजन के लिए पूरी तरीके से समर्पित होकर काम करने पर नोडल अधिकारी डा. रचना गुप्ता को स्वास्थ्य मंत्री ने चार मार्च को लखनऊ में सम्मानित किया।

कुछ करने की थी तमन्ना

नारी स्वयं को अबला समझकर पुरुषों के आगे नहीं बोल पाती हैं। बच्चे को भगवान की देन समझकर परिवार को बड़ा करती जा रही थी। मातृ मृत्यु दर में इजाफा होने पर आगरा का स्वास्थ्य विभाग चितिंत था । परिवार नियोजन कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डा.रचना गुप्ता इन महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि ‘मेरे मन में महिलाओं के लिए कुछ खास करने की तमन्ना थी। गांव की महिलाएं परिवार नियोजन का प्रयोग करने से घबराती थीं। यूं कहें कि वह परिवार नियोजन के साधनों की बात करने तक में शर्माती थी। ऐसे में महिलाओं को जागरूक किया। उन्हें फायदे बताएं, तब महिलाएं कॉपर टी, अंतरा समेत अन्य साधनों को अपनाने में आगे आईं।’

स्टाफ का साथ लिया

डा.रचना गुप्ता ने आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम को जागरूक किया। मीटिंग में डाक्टर, जिला महिला अस्पताल का स्टाफ, एनजीओ के पदाधिकारी, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम को जागरूक किया। बताया कि परिवार के डिसीजन मेकर यानी परिवार के मुखिया को जागरूक करें। उनकी रणनीति पर काम हुआ। हर गांव तक परिवार नियोजन के जरिए पहुंच बनाई गई। डा.रचना का कहना है कि परिवार नियोजन के साधनों को आमजन तक पहुंचाया। तब जाकर महिलाओं को रुढ़ीवादी मानसिकता को खत्म कर कॉपर टी जैसे साधनों का प्रयोग कराया जा सका।

जागरूक हुईं आगरा की आधी आबादी, सबको पछाड़ा

नोडल अधिकारी डा.रचना की मेहनत से आगरा की आधी आबादी जागरूक हो गई। आगरा की महिलाओं ने सूबे के दूसरों जिलों को पछाड़ दिया। सूबे में सर्वाधिक आगरा की महिलाओं ने कॉपर टी का प्रयोग किया जिसके चलते आगरा को सूबे में नंबर वन का तमगा हासिल हुआ। यह सब डा. रचना गुप्ता की मेहनत से हो सका। उनकी इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें सम्मानित किया। इससे पूर्व अखिलेश सरकार में भी उन्हें परिवार नियोजन के लिए सम्मानित किया जा सका।

कॉपर टी ने आगरा को दिलाया नंबर वन का तमगा

आईयूसीडी यानी कॉपर टी का प्रयोग करने पर आगरा की महिलाएं सूबे में टॉप पर हैं। यहां पर 24946 महिलाओं ने कॉपर टी का लाभ लिया। प्रसव के बाद पीआईयूसीडी में 7919 का प्रयोग हुआ है। इसमें जिला पांचवें मुकाम पर है। इसी तरह  8658 अंतरा इंजेक्शन का प्रयोग करने पर आगरा पांचवें मुकाम पर है। पुरुष नसबंदी में आगरा यूपी में चौथे नंबर पर है। अभी तक 311 लोगों ने पुरुष नसबंदी कराई है। इसी तरह महिला नसबंदी में 6777 नसबंदी कराने पर जिला पांचवें पायदान पर है।

कोरोना वॉयरस से बचाव में जुटी डा. रचना गुप्ता 

परिवार नियोजन कार्यक्रम में अपनी दायित्वों का बेहतर निर्वाहन करने के चलते डा. रचना गुप्ता को कोरोना वॉयरस का नोडल अधिकारी बनाया गया। इस काम में वे मेहनत से लगी हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि जागरूकता अपनाकर अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

पीआईयूसीडी में डा. ममता किरन का मिला साथ

किरण लेडी अस्पताल में कार्यरत डा. ममता भी परिवार नियोजन की मुहिम में अहम स्थान रखती हैं। पीआईयूसीडी मतलब प्रसव के बाद महिला को कॉपर-टी लगवाना। इस काम में डा. ममता ने खूब योगदान दिया। उन्होंने महिलाओं और उनके साथ आए लोगों को जागरूक किया। यही वजह थी कि जिले ने पांचवां स्थान हासिल किया। डा. ममता ने अपने संस्थान से पीपीआईयूसीडी के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम कर परिवार कल्याण में सराहनीय योगदान दिया।

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