बेटा समझाओ, बेटी बचाओ के नारे के साथ सड़क पर उतरे सैकड़ों लोग

आगरा। दिल्ली में हुए निर्भया कांड की तस्वीरें लोगों की आंखों में धुंधली नही हो पाई थी कि हैदराबाद और उन्नाव कांड ने लोगों को हिलाकर रख दिया था। लड़कियों के साथ बढतें हुए जघन्य अपराधों से लोगो में रोष व्याप्त है। यही वजह है कि आम व्यक्तियों को बेटी की सुरक्षा और उन्हें शिक्षित बनाये जाने के प्रति जागरूक बनाने के लिए निकाली गई जन जागरूकता रैली में इस बार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के साथ आगरा में ‘बेटा समझाओ-बेटी बचाओ’ और ‘अब बस, और नहीं…’, के नारों की गूंज भी सुनाई दी।

मंगलवार को स्मृति संस्था और रेनबो हाॅस्पिटल के तत्वावधान में नव वर्ष के उपलक्ष्य में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, सामाजिक संगठनों के लोग, डाॅक्टर और स्कूल-काॅलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

सभी लोग सड़क पर हाथों में ‘बेटी-बचाओ,बेटी पढ़ाओ‘ और बेटी के उत्थान की संदेश लिखीं तख्तियां, बैनर, स्टीकर हाथ में लेकर उतरे। यह रैली रैनबो हॉस्पिटल से शुरू हुई और गुरुद्वारा गुरु के ताल पर जाकर समाप्त हुई। रैली का शुभारंभ रेनबो हाॅस्पिटल के मुख्य द्वार से मुख्य अतिथि शक्ति सिंह गुरूद्वारा गुरू का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह, रेनबो ग्रुप के चेयरमैन डा. आरएम मल्होत्रा, रेनबो आईवीएफ की निदेशक डा. जयदीप मल्होत्रा, वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. आरसी मिश्रा और रेनबो हाॅस्पिटल के निदेशक व स्मृति संस्था के अध्यक्ष डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने हरी झंडी दिखाकर किया।

सड़कों पर उतरे सैकड़ो लोगों में से किसी के हाथ मे बेटी को अधिकार दो, बेटों जैसा प्यार दो का स्लोगन लिखा था तो कोई बदलो अपनी सोच, बेटी नहीं है बोझ, जिस घर में बेटी का सम्मान, वह घर होता स्वर्ग समान लिखी तख्तियों से जागरूक बना रहा था। किसी ने बेटी बढ़ेगी,देश बढ़ेगा, बेटी नहीं है किसी से कम, मिटा दो अपने सारे भ्रम, हर बेटी की यही पुकार, हमारे जीवन में करो सुधार के नारों को लगाकर लोगों की शौच बदलने का प्रयास किया।

इस दौरान मुख्य अतिथि शक्ति सिंह और बाबा प्रीतम सिंह ने अपने शब्दों से सामाजिक और बेटा-बेटी के भेदभाव को खत्म करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि समाज बदल रहा है इसलिये लोगों को अपनी सोच भी बदलनी चाहिए। लड़की घर की लक्ष्मी होती है जिससे दो परिवार जुड़े होते है और दो परिवार को संभालने की जिम्मेदारी को वो बखूभी निभाती है।

डा.जयदीप मल्होत्रा ने कहा कि नए भारत की लड़कियां अब बहुत आगे निकल गई हैं। समाज बदल रहा है, हालांकि अभी और सुधार की जरूरत है। शिक्षा से लेकर राजनीति और व्यापार से लेकर खेलों तक आज बेटियों ने खुद को अव्वल साबित किया है। डा. नरेंद्र मल्होत्रा ने कहा कि महिलाओं के प्रति सोच बदलने की जरूरत है। सोच बदलेगी तो समाज बदलेगा। स्मृति संस्था कीं निदेशक डा. निहारिका मलहोत्रा ने कहा कि आज से 10 वर्ष पूर्व मेरे पिता ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था, लेकिन आज 10 साल बाद हम देखते हैं कि बेटियां पढ़ तो रही हैं, लेकिन बच नहीं रही हैं। यही वजह है कि 10 साल बाद हमने इसे बदलकर बेटा समझाओ-बेटी बचाओ का नारा बुलंद किया है। रैली गुरूद्वारा गुरू का ताल पहुंचकर संपन्न हुई, जहां सर्वश्रेष्ठ संदेश लिखी तख्तियों के आधार पर छात्रों को पुरस्कृत किया गया।

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