प्रशासन की लापरवाही की भेंट चढ़ा पिता, दो बेटियों ने एक साथ की इच्छा मृत्यु की मांग

आगरा। कागजी कार्यवाही को बिना काम किये ही किस तरह से दौड़ाना है यह कोई सिर्फ सरकारी विभाग से सीखे। इस कागजी कार्यवाही की दौड़ में सदर थाना क्षेत्र के कृष्णा कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार के मुखिया ने दम तोड़ दिया। मुखिया नानक चंद की मृत्यु हो जाने से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मृतक नानकचंद की दो पुत्री पिता की मृत्यु के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, देश के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आगरा प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। इतना ही नही मृतक नानकचंद की दोनो बेटियों ने प्रधानमंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। शहर की दो बेटियों की ओर से इच्छा मृत्यु की मांग से हड़कंप की स्थिति बन गयी है।

बताया जाता है कि मृतक नानकचंद टेक्सटाइल कंपनी में मजदूरी पर काम करता था लेकिन बीमारी ने ऐसा जकड़ा कि पांच साल से उसका इलाज चल रहा था और वो बेरोजगार था। पांच साल में मृतक नानकचंद के इलाज में पूरी जमा पूंजी खर्च हो गयी बल्कि कर्जा भी हो गया।
मृतक नानकचंद की बड़ी बेटी बताती है कि पिता के इलाज के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को एक साल पहले पत्र लिखा था। इस पत्र पर काफी दिनों बाद कार्यवाही हुई। मदद से संबंधित पत्र मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय से आगरा जिलाधिकारी को पत्र भी आया। जिला अधिकारी ने भी एसडीएम और तहसीलदार को भेजा। सभी ने घर और पिता की स्थिति को देखा लेकिन कोई मदद नहीं की। पूछताछ पर सिर्फ एक ही जबाब मिलता था कि कागजी कार्यवाही चल रही है। इस सरकारी कागजी कार्यवाही के कारण पिता को इलाज तो नही मिला लेकिन पिता को मृत्यु जरूर मिल गयी।
पिता की मौत से परिवार में कोहराम है तो आर्थिक संकट के बीच कर्जदार भी पैसा लेने में पीछे नही है।

मृतक की बेटी का कहना है कि इस सरकारी सिस्टम और कागजी कार्यवाही ने पिता को मौत तो दे दी है लेकिन अब वो भी जीना नही चाहती है। इसलिए सूबे के मुखिया और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग की गई है।

फिलहाल कुछ भी हो लेकिन समाज में कुछ लोगों को वास्तव में मदद की जरूरत है लेकिन प्रशासन सब कुछ जानने के बावजूद आंखे मूंदे बैठा है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार में एक नहीं दो दो बेटियां इच्छा मृत्यु की मांग करे तो इस सरकार की कर व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।

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