रिवाजों के नाम पर बाल विवाह में न बांधो, बाल शोषण और साइबर क्राइम पर आयोजित हुई कार्यशाला

Do not tie child marriage in the name of customs, workshop organized on child abuse and cybercrime

आगरा। रिवाजों के नाम पर यूं न बांधों, नन्हें कंधों पर बाल विवाह का बोझ न डालो। ‘आई एम ए चाइल्ड नाॅट ए ब्राइड’ आदि स्लोगन लिखे पोस्टर और कविताओं के माध्यम से बेटियों ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि इस सामाजिक बुराई को मिलकर खत्म करना होगा। बाल शोषण के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजन सप्त दिवसीय शिविर में छात्राओं के लिए बाल विवाह, बाल शोषण और साइबर क्राइम पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें चाइल्ड राइट एक्सपर्ट एवं महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने छात्राओं को प्रशिक्षण दिया। इन विषयों पर पोस्टर, कविता और भाषण प्रतियोगिता कराई गई। नरेश पारस लगातार काॅलेज, महाविद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में जाकर बालिकाओं को बाल अधिकारों पर प्रशिक्षण दे रहे हैं।

आगरा में 21 फीसदी बाल विवाह-

नरेश पारस ने बताया कि नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में 21 फीसदी बाल विवाह होते हैं। यह एक अपराध है। इसे जागरूकता और कानून के माध्यम से ही खत्म किया जा सकता है। बाल यौन शोषण भी एक चुनौती के रूप में उभरा है। लड़कियां ही नहीं लड़कों के साथ भी यौन शोषण की घटनाएं सामने आ रही हैं। बच्चों को सतर्क रहने की जरूरत है। साइबर क्राईम की बारीकियों के बारे में भी बताया। कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान लिंक को न खोलें और किसी को ओटीपी न बताएं।

गिव्स बुक, नाॅट हसबेंड-

छात्राओं ने अंग्रेजी में भी बेहतरीन संदेश दिए। पोस्टर के माध्यम से बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा ने लिखा कि ‘स्टाॅप चाइल्ड मैरिज, गिव्स अस बुक नाॅट हसबेंड’। वहीं बीए द्वितीय वर्ष की शिवानी ने भी संदेश दिया, ‘से नो चाइल्ड मैरिज’। बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा कविता शर्मा ने बाल विवाह को लूजिंग गेम बताया। बीए द्वितीय वर्ष की वीनू यादव ने लिखा ‘आई एम ए चाइल्ड, नाॅट ए ब्राइड’। शालिनी ने कहा, ‘आई एम ए गर्ल चाइल्ड, डू नाॅट मेक मी ए चाइल्ड मदर’।

इस मौके पर बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा संजना कुमारी ने एक गीत भी प्रस्तुत किया। उन्होंने लिखा कि –

शिक्षा का दीप जलाएं
घर-घर शिक्षा का दीप जलाएं,
बाल विवाह को बंद कराएं।
बेटी पढ़ाने की लो राह,
बंद करो ये बाल विवाह।
पढ़ने-लिखने की उम्र है,
बाल विवाह जुर्म है।
बोझ न समझो बेटी को,
अब आजादी दो बेटी को।
आओ मिलकर बढ़ाएं कदम,
बाल विवाह को मिटाएं हम।

इस कार्यशाला में महाविद्यालय की असिसटेंट प्रोफेसर डाॅ. कंचन गुप्ता, कृष्ण बाला सिंह तथा एकता मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने इस कार्यशाला को छात्राओं के लिए उपयोगी बताया। कहा कि छात्राओं का जागरूक होना बहुत जरूरी है।

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