नववर्ष के आगमन पर पंचवटी कॉलोनी में दिखा भक्ति का संगम

आगरा। कीर्तन की अमृत वर्षा में झूमी संगत धार्मिक रसधारा, झूमती संगत, हिलोरे मारता जनसमूह, रंगीन रोशनी से जगमग वह भव्य पंडाल, मधुर कंठ से गूंजते गुरुवाणी बोल। यह आलोककिक नजारा था पारसनाथ पंचवटी ताजनगरी में आयोजित भव्य कीर्तन का। नव वर्ष की पावन बेला में आयोजित यह संगम जब प्रभु नाम के साथ जुडा तो मानो बैकुंठ का नजारा सा धरती पर प्रवलित हो रहा था।

मधुर कंठ के धनि वीर पंथ के महान कीर्तनकार भाई वीर महेंद्र पाल सिंह ने सर्वप्रथम 1 राम जपो जी ऐसे ऐसे ध्रुव प्रह्लाद जपियो हर जैसे का गायन किया और बताया प्रभु प्राप्ति के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं है। वहां केवल सच्ची भावना और भाव चाहिए प्रहलाद और भगत ध्रुव ने छोटी सी उम्र में ही प्रभु को प्राप्त कर लिया था। क्योंकि उनके पास भाव और भरोसा था। उसके बाद उन्होंने शुक्राने रूप में 2 रहम तेरी सुख पाया सदा नानक की अरदास शब्द का गायन कर सभी का मन मोह लिया। उन्होंने कहा परमेश्वर के चरणो में यह शिकायत नहीं करो कि प्रभु तूने मुझे कम दिया बल्कि यह अरदास किया करो कि है मालिक जितना तूने मुझे दिया उतना कइयों को नही दिया। उन्होंने कहा, हे इंसान तू प्रभु से से प्रेम कर दुनिया तेरे से प्रेम करेगी तू प्रभु को नमस्कार कर दुनिया के लोग तुझे नमस्कार करेंगे, तू प्रभु का बन जा दुनिया तेरी बन जाएगी। उन्होंने भगत नामदेव जी का शब्द मैं बोरी मेरा राम बता का गायन कर इस शब्द से सीख लेने की प्रेरणा दी।

संगत के विशेष अनुरोध पर उन्होंने एक के बाद एक कई शब्दों का गायन कर सभी को भाव विभोर कर दिया। अंत में उन्होंने कहा कि हम लोग अपने विचार और बुराइयों छुपाते हैं और अपनी अच्छाईयां दिखाते हैं लेकिन ईश्वर हमारे घट घट की जानता है। इसलिए इस नए साल के आगमन पर अपनी बुराइयों को और विचार गुरु को सौंप दे और बुराई ना करने का प्रण लें। गुरु की मति अनुसार अच्छे गुणों का पालन कर नया साल आरंभ करें। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के आगे ज्ञानी अमरीक सिंह जी द्वारा अरदास के उपरांत गुरु का अटूट लंगर बरताया गया।

सभी लोगों ने एक साथ पंडाल में बैठकर ग्रहण किया। इतने सुंदर आयोजन हेतु नए वर्ष के लिए एक दूसरे को शुभकामनाएं दी। पूरी पंचवटी परिवार ने एक दूसरे को इसी प्रकार भाईचारे का संदेश देते हुए आई सभी संगत का आभार व्यक्त किया और वीर महेंद्र पाल का गुरु का सरोपा पहनाकर सम्मान किया।

गुरु सेवक श्याम भोजवानी, बलविंदर सिंह बाबा, राजकुमार जेठवानी, गुरमीत सलूजा, रमन छाबड़ा, पुनीत मेहंदीरत्ता, उपेंद्र सिंह, उमेश चड्डा राजकुमार जेठवानी आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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