बच्चों द्वारा पीपीई किट में लकड़ी ले जाने पर बाल आयोग ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव से मांगा जबाव

आगरा। कोरोना पाॅजिटिव का ईलाज करते समय डाक्टरों द्वारा पीपीई किट पहनी जाती है जिससे उनको संक्रमण न सके। इस्तेमाल के बाद विधिवत उसका निस्तारण भी किए जाने का प्रावधान है लेकिन आगरा में पीपीई किट को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। इस्तेमाल के बाद उनका सही निस्तारण नहीं किया जा रहा है। आगरा में इस्तेमाल की गई पीपीई किट में बच्चे लकड़ी ले जाते हुए दिखाई दिए। बच्चों को उसके बारे में जानकारी नहीं थी कि इस किट में लकड़ी ले जाने से उनको भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है। इस मामले में चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट एवं महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत की थी। जिसका संज्ञान लेकर आयोग ने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तीन दिन में जबाव मांगा है।

शिकायत में नरेश पारस ने कहा था कि बच्चों तथा उनके परिवार की कोरोना जांच कराई जाए। उनको संक्रमण हो सकता है। बच्चों से जानकारी ली जाए कि उनको यह पीपीई किट कहां से मिली। यह स्वास्थ्य विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को हिदायत दी जाए कि कोरोना के ईलाज में इस्तेमाल किए गए मेडिकल उपकरणों तथा मेडिकल वेस्ट का सही निस्तारण कराया जाए।

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