छावनी परिषद के चुनाव टले, बोर्ड का कार्यकाल बढ़ा, बैठक में 50 मुद्दों पर हुई चर्चा

आगरा। कोरोना संकट को देखते हुए छावनी परिषद के होने वाले चुनावों को टाल दिया गया है जिसका फायदा वर्तमान जन प्रतिनिधियों को मिला है। चुनाव न होने के कारण छावनी परिषद बोर्ड का कार्यकाल 6 महीने के लिए बढ़ गया है। गुरुवार को छावनी परिषद बोर्ड की बैठक सम्पन्न हुई। इस बैठक में राज्यमंत्री डॉ.जीएस धर्मेश, स्टेशन कमांडर, सीईओ ज्योति कपूर, बोर्ड उपाध्यक्ष पंकज महेंद्रू,एडीएम सिटी मौजूद रहे। बैठक में लगभग 50 मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें क्षेत्र के विकास, राजस्व व अन्य मुद्दे शामिल रहे।

छावनी परिषद की सीईओ ज्योति कपूर ने बताया कि आज छावनी बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई है जिसमें सेना के अधिकारी के साथ जनप्रतिनिधियों व विभागीय अधिकारियों ने भाग लिया था। कोरोना संक्रमण के कारण यह बैठक सम्पन्न नहीं हो पाई थी। बैठक के दौरान 50 महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चाएं की गई है जिसमें प्रशासनिक व जनता से जुड़े हुए मुद्दे शामिल थे। बैठक के दौरान कंजर्वेंसी एग्रीमेंट, सेवला पर सॉलिड वेस्ट मुद्दों पर चर्चा हुई। सरकार की ओर से जो ग्रांट मिलनी थी वो मिल गयी है, जल्द ही इस ग्रांट को क्षेत्र के विकास के लिए खर्च की जाएगी। इसके लिए बोर्ड में प्रस्ताव भी पारित हो गए है जिन्हें जल्द ही अमली जामा पहनाया जाएगा। विकास कार्यो में प्राथमिकता सफाई और पेयजल उपलब्ध कराना है। जल्द ही क्षेत्र में नाले नालियों का निर्माण कराया जाएगा।

छावनी परिषद की सीईओ ज्योति कपूर में बताया कि ईस बोर्ड का एक्सटेंशन फिर बढ़ गया है। कोरोना संक्रमण के कारण 6 महीने के एक्सटेंशन में चुनाव नहीं हो पाए हैं। इसलिए बोर्ड को 6 अगस्त के बाद से 6 महीने या फिर चुनाव होने तक का एक्सटेंशन मिल गया है। वर्तमान जन प्रतिनिधि लगभग 6 महीने और पार्षद की जिम्मेदारी निभाएंगे। छावनी परिषद एरिया में मोबाइल टावर की विकराल समस्या है। इस समस्या को दूर करने के लिए 12 टावर लगाए जाने हैं। इसके प्रस्ताव को भी बोर्ड की बैठक में रखा गया जिस पर स्वीकृति मिल गयी है।

बोर्ड की बैठक में छावनी परिषद एरिया में असिसमेन्ट को लेकर भी चर्चा की गई, ऐसा बताया गया है। असिसमेन्ट को कोरोना संकट के चलते शून्य करने की बात कही गई है।राज्यमंत्री डॉ जीएस धर्मेश का कहना था कि ग्वालियर रोड़ स्थित शक्तिनगर में जो लोग रहते हैं उन लोगों को ही मालिकाना हक दे दिया जाए। छावनी परिषद की मुख्य अधिशासी अधिकारी ज्योति कपूर ने बताया कि वह जमीन छावनी परिषद की है। ऐसे में मालिकाना हक देना गलत है।

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