दिल्ली के बाद अब आगरा में किसानों पर बरसी पुलिस, पथराव-बवाल और लाठीचार्ज

आगरा। इनर रिंग रोड के दूसरे चरण को पूरा करने के लिए आखिरकार प्रशासन ने देश के अन्नदाता किसानों पर अपना चाबुक चला ही दिया। प्रशासन ने धरने पर बैठे किसानों पर लाठी चार्ज किया और सभी को धरना स्थल से खदेड़ दिया। इतना ही नहीं, जिन किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया तो उन्हें दौड़ा दौड़ा कर पीटा गया। पुलिस ने लाठीचार्ज के दौरान किसी को नहीं बख्शा चाहे वो महिला हो या फिर बच्चे।

इनर रिंग रोड में हुए करोड़ों के घोटाले की सीबीआई जांच कराने, उचित मुआवजा, ब्याज व जिन किसानों ने करार नहीं किया उन्हें चार गुना मुआवजा और किसानों को अन्य योजनाओं में लाभ देने की मांग को लेकर पिछले 22 महीनों से पीड़ित किसान गांव गुतला में धरना दे रहे हैं। जिसके कारण इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का करोड़ों का प्रोजेक्ट रुका पड़ा है।

गुरुवार को इनर रिंग प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का कार्य पूरा करने के लिए एसडीएम अभिषेक के नेतृत्व में ADA, प्रशासन और पुलिस अधिकारी कई थानों का फ़ोर्स लेकर गांव गुतला पहुँचे। अधिकारियों ने फ़ोर्स के साथ जमीन पर कब्जा लेना शुरू किया तो 22 महीने से धरना दे रहे किसानों ने विरोध शुरु कर दिया। पुलिस ने बल प्रयोग कर किसानों को खदेड़ दिया। घटनाक्रम की जानकारी होते ही किसान नेता श्याम सिंह चाहर पहुँचे और बातचीत न होने तक काम रुकवाने की पहल की लेकिन अधिकारियों ने अनसुनी की। इस दौरान दोनों के बीच तडकभड़की हो गई। पुलिस ने किसानों से मारपीट कर दी। उधर काम नहीं रुकने से ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने कंपनी की गाड़ियों पर पथराव कर दिया। पुलिस ने किसानों को हिरासत में लेकर थाना ताजगंज भेज दिया।

किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना था कि प्रशासन अपनी जिद पर अड़कर किसानों के साथ अन्याय कर रहा है। सरकार द्वारा कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। नियमों की धज्ज्यिों को उड़ाते हुये किसानों का हक मारा जा रहा है। किसानों को 18, 94 एक्ट के तहत मुआवजा नहीं दिया जा रहा है, जिसमें प्रावधान है कि किसानों से जमीन अधिग्रहीत करते सयम 80 फीसद मुआवजे की रकम मिल जानी चाहिये। इसके साथ ही बकाया रकम पर 9 फीसद ब्याज का प्रावधान है। उधर किसानों ने अधिकारियों से साफ कहा कि जब तक उचित ब्याज सहित अन्य मांगे पूरी नहीं हो जाती इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। अगर प्रशासन ने बल प्रयोग से जमीन लेने प्रयास किया तो किसान मरने मारने पर उतारू हो जाएंगे।

इस मौके पर किसान नेता श्याम सिंह चाहर, कृपाल सिंह, मुकेश पाठक, हाकिमसिह, राजेन्द सिहं, भोलाराम सहित सैकडों किसानों ने विरोध दर्ज कराया।

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