जेल से 7 साल बाद फिर भागे बंदी, 4 सुरक्षाकर्मी निलंबित

मथुरा। नया साल तो जिला कारागार में निरुद्ध 3 बंदियों ने मनाया, जो नव वर्ष के लगते ही खुद को बंधन मुक्त करते हुए जेल से भाग खड़े हुए। उनके साथ एक अन्य बंदी ने भी भागने का प्रयास किया मगर वह सफल नहीं हो सका।

बंदियों के भागने की सूचना मिलते ही डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी सोमवार दोपहर मथुरा जिला कारागार आ गए, जिन्होंने घटना की प्रारंभिक जांच के दौरान एक प्रधान बंदीरक्षक सोनवीर सिंह, बैरक प्रभारी अभयराम, दीवार की गश्त पर तैनात बंदीरक्षक विजय सिंह और गश्त निरीक्षक बंदीरक्षक हीरेंद्र को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है।

बताया जाता है कि यह चारों बंदी 18 से 21 वर्ष की आयु वाले बंदियों की 17 नंबर बैरक में निरुद्ध थे, जिसकी करीब 15 फुट ऊंची दीवार पर 3 बंदियों ने डंडियों के सहारे चढ़कर उन्होंने सीमेंटेड छत काटी और फिर जेल की 18 फुट ऊंची दीवार पर भी डंडियों के सहारे चढ़कर बाहर कूद गए।

इनके अलावा एक अन्य बंदी, जिसने और भागने का प्रयास किया, उसका नाम भी राहुल है। वह ग्वालियर का रहने वाला है। भागने के प्रयास में समय दीवार से गिर जाने के कारण उसके पैर में चोट आ गई, जिससे वह भाग नहीं सका। इसी मध्य गश्त को चेक करने वाला बंदीरक्षक हीरेंद्र वहां आ गया, जिसे कैदियों के भागने का तत्काल पता चल गया।

जेल अधीक्षक के अनुसार यह घटना रात्रि करीब 1:30 बजे से 1:50 बजे के मध्य हुई, जिसकी सूचना उन्हें 1:56 बजे मिल गई। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचित करते हुए स्वयं अपने फोर्स के साथ जवाहर बाग तक दौड़ भागकर भागे बंदियों की खोज की। लेकिन रात्रि में कोहरा अधिक होने के कारण उनका कहीं सुराग नहीं लगा।

डीआईजी जेल ने मून ब्रेकिंग से बातचीत में बंदियों के भागने की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया उनका कहना था कि सुरक्षा में चुक के कारण ही चारो अपराधी भागने में फरार हुए है। उक्त चारों जेल सुरक्षा कर्मियों को प्रथमदृष्टया लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है।

मथुरा जिला कारागार से बंदियों के भागने की यह कोई पहली घटना नहीं है। सन् 2010 में भी इसी प्रकार यहां से 4 बंदी भाग चुके हैं। इसके अलावा 2014 में यहां राजेश टोटा जैसे बदमाशों की गैंगवार हो चुकी है और उससे पहले जेल के अंदर बंदियों को कैप्सूल में जहर देकर भी मारा जा चुका है।

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