महज़ 50 साल की उम्र में हो जाती है यहाँ पुरूषों की मृत्यु

कानपुर। अपना खून-पसीना बहाकर पत्थर खदानों में काम कर पत्थरों को बाहर निकालने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य के प्रति सरकार प्रशासन और मजदूरों से काम कराने वाले मालिक सजग नहीं है जिसके कारण पत्थर खदान में काम करने वाले अधिकतर मजदूर सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित हो चुके हैं। इस बीमारी के कारण अधिकतर मजदूरों की मृत्यु 40 से 50 वर्ष की उम्र में हो जाती है।

पत्थर खदान मजदूरों की समस्या जाने के लिए मून ब्रेकिंग की टीम कानपुर क्षेत्र में पहुंची, जहां पर पत्थर खदान में काम कर रहे मजदूरों की समस्याओं को जाना और मजदूरों से इस बीमारी का भी जिक्र किया। मजदूरों का कहना है कि उनके स्वास्थ्य के प्रति उन्हें किसी प्रकार की सहूलियत नहीं मिल पा रही है जिससे लोगों की 50 वर्ष की उम्र तक नहीं मृत्यु हो जाती है। कुछ मजदूर तो ऐसे मिले जिन्हें सिलिकोसिस की बीमारी थी लेकिन अभी तब चिकित्सक टीबी की बीमारी समझ उनका इलाज कर रहे थे। जब उन्हें इस बीमारी के बारे में पता चला जब तक उनकी सारी जमा-पूंजी खर्च हो गई। अब इन पीड़ितों ने जिला अधिकारी से गुहार लगाई है कि उन्हें सरकारी इलाज मुफ्त में मिल सके।

काफी समय से मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की लड़ाई लड़ रहे उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा ने एक बार फिर मजदूरों की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। इस समस्या से प्रदेश सरकार की नींद तोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश ग्रामीण संगठन के अध्यक्ष राम शर्मा तुला राम शर्मा 21 जनवरी को विशाल सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं जिसमें उत्तर प्रदेश के सारे पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे।

इस सम्मेलन में सिलिकोसिस बीमारी से मजदूरों को बचाने के लिए मजदूर वेलफेयर बोर्ड और पत्थर खदान के आसपास बेहतर चिकित्सालय खोले जाने की मांग करेंगे।

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