टोरंट पावर की इस नीति के खिलाफ तेज़ हुआ ग्रामीणों का आंदोलन

आगरा। टोरंट पावर की नीतियों के विरोध में धरने पर बैठे मिनी सैफई कुआं खेड़ा के लोगों ने बमरौली कटारा फीडर से बिजली प्राप्त कर रहे करीब डेढ़ दर्जन गांवों में जन जागरण रैली निकाली। इस रैली का उद्देश्य लोगों को टॉरेंट की जनविरोधी नीतियों के प्रति जागरूक बनाया। इस रैली के बाद धरना स्थल पर एक जनसभा आयोजित की गई, जिसमें पूर्व विधायक डॉक्टर धर्मपाल सिंह ग्रामीणों को समर्थन देने के लिए पहुंचे ।

टोरंट पावर की नीतियों के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन दिन प्रतिदिन तेज होता चला जा रहा है। रविवार को कुआं खेड़ा के सैकड़ों युवा मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों पर सवार होकर हाथों में तिरंगा झंडा लिए टॉरेंट पावर की नीतियों के खिलाफ बुढ़ाना, करवना, तोरा, कलाल खेरिया, मियांपुर, बुडेरा, बमरौली कटारा एत्मादपुर मदरा और महुआ खेड़ा गांव पहुंचे। इस रैली में शामिल सभी लोगों ने सभी गांव के ग्रामीणों से टोरेंट पावर की नीतियों के विरोध में चल रहे विरोध में सहयोग मांगा। इस जन जागरण यात्रा का हर गांव में स्वागत हुआ। हर गांव के लोगों ने टॉरेंट के खिलाफ जारी लड़ाई में अपना सहयोग देने का वायदा भी किया। करीब 4 घंटे तक डेढ़ दर्जन गांवों का भ्रमण करने के बाद यह रैली जनसभा में तब्दील हुई, जिसमें समाजवादी युवजन सभा के पूर्व शहर अध्यक्ष विवेक यादव, ग्राम प्रधान करवना राधेश्याम यादव, पूर्व विधायक डॉ धर्मपाल सिंह अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे और लोगों को संबोधित करते हुए टोरंट के खिलाफ इस लड़ाई में अंत तक संघर्ष करने की बात कही।

ग्रामीणों का कहना था कि बमरौली कटारा फीडर से जुड़े सभी गांव ग्रामीण क्षेत्र के हैं। शहरी सीमा से बाहर हैं टोरंट पावर पिछले 8 साल से इन सभी गांव में शहरी टैरिफ से बिजली वसूल रही है जो न्यायोचित नहीं है। ग्रामीण गांधीवादी तरीके से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती से ही पिछले 6 दिन से धरना दे रहे है। अगर टोरंट ने अपना रवैया नही बदला तो फिर उग्र आंदोलन होगा।

पूर्व विधायक डॉ धर्मपाल का कहना था कि अप्रैल 2010 में टॉरेंट पावर ने जब आगरा शहर की विद्युत व्यवस्था टेक ओवर की थी, उस समय बमरौली कटारा फीडर को शहर में दर्शा दिया था जो बिल्कुल अनुचित है। इस फीडर से जुड़े सभी 18 गांव ग्रामीण क्षेत्र के हैं, जहां ग्राम पंचायतें काम कर रही है। ग्रामीणों की मांग जायज हैं। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को हस्तक्षेप कर इन गांव में ग्रामीण दर से बिजली के बिल वसूलने चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वे ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन करेंगे।

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