कपूत बेटे की सलामती के लिए माँ ने रखा अहोई अष्‍टमी का व्रत

आगरा। पूत कपूत सुने बहु तेरे माता सुनी न कुमाता। कलयुग में यह कहावत पूरी तरह से चरितार्थ नज़र आती है। आज अहोई अष्‍टमी का पर्व है। इस व्रत को मां अपनी संतान की सुख, समृद्धि और लंबी आयु के लिए करती है। पुराणों में कहा गया है कि इस व्रत को करने वाली मां की संतानों को किसी भी तरह का कष्ट नहीं होता है। यह व्रत भी काफी कठिन है, क्योंकि इस व्रत को करवा चौथ व्रत की तरह रखा जाता है। माताएँ पूरे दिन कुछ भी नहीं खाती और न ही जल ग्रहण करती हैं। बिना कुछ खाए पिये रखती हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो ये व्रत भी निर्जला होता है। इस अवसर पर विधवा आश्रम, रामलाल वृद्ध आश्रम और अन्य आश्रमो में रह रही माताओ से वार्ता की। वार्ता के दौरान पता चला की इन आश्रमो में रह रही माताओ ने भी अपने बच्चों के लिए अहोई अष्‍टमी का व्रत रखा है।

इन माताओं से जैसे उनके बच्चों के बारे में पूछा गया तो उनकी आँखे झलक गयी। इनमे से कुछ माताओं का पूरा परिवार है लेकिन अपने निजी स्वार्थ के लिए संतानों ने घर से बाहर निकाल दिया है। जिन बच्चों को बचपन से पाल पोसकर बड़ा किया, अब उन बच्चों के दिलों में अपनी मां के लिए ही जगह नहीं है। वे अपने जीवन में इतने व्यस्त हैं, कि अपनी मां तक को भूल गए हैं। इन बच्चों ने भले ही बुरा किया हो लेकिन मां का दिल फिर भी अपने बच्चों के लिए तड़पता रहा है। और इनकी सुख स्मृद्धि के लिए आज व्रत भी रखा है।

इन माताओ के आँखों में आँसू थे उनका कहना था कि पहले बच्चों को देखकर यह व्रत खोला जाता था लेकिन पिछले काफी समय से बच्चों की तस्वीर देखकर व्रत खोल लेते है। बच्चों के साथ न होने का दर्द उनकी आवाज़ में साफ़ झलक रहा था।

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