एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने संजली हत्याकांड के खुलासे पर उठाए सवाल

आगरा। नव वर्ष की खुशियों में जब पूरा शहर डूबा हुआ था। उस समय संजली के परिजिन को सांत्वना देने के साथ साथ इस दर्द को एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता पीएल पुनिया बांट रहे थे। नववर्ष की बेला पर एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष आगरा पहुँचे और कांग्रेस नेताओं के साथ संजली के गांव लालऊ पहुँचे हुए थे। जहाँ कांग्रेस नेता और एससी आयोग के पूर्व चैयरमैन ने संजली के परिजन से पूरी घटना की जानकारी ली और अपनी संवेदनाये व्यक्त की। कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से उनके साथ खड़ी है।

बता दें कि मलपुरा थाना के गांव लालऊ में 18 दिसंबर को स्कूल से लौटते वक्त 15 वर्षीय संजली पेट्रोल डालकर जला दिया गया था। दिल्ली में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी थी। पुलिस ने इस वारदात का खुलासा किया और संजली के चचेरे भाई को मुख्य आरोपी बताया लेकिन संजली की मौत के बाद उसके चचेरे भाई जो मुख्य आरोपी था उसने भी आत्महत्या कर ली थी। पुलिस के इस खुलासे से संजली के परिजन सहमत नहीं हैं तो जाटव समाज भी सीबीआइ जांच की मांग उठा रहा है।

संजली के परिजनो से मिलने के बाद एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष पीएल पुनिया एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से रूबरू हुए। पत्रकार वार्ता के दौरान एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि संजली हत्याकांड में जांच के नाम पर पुलिस परिजनों का उत्पीडऩ कर रही है। पीडित परिवार की न्याय की मांग को दबाया जा रहा है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भी संजली के परिजन, जाटव महापंचायत की तरह ही संजली हत्याकांड की सीबीआइ जांच की मांग उठाई।

प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संजली हत्याकांड में परिजनों को सरल विकल्प के रूप में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर अंकुश लगाने की जगह उन्हें बचाया जा रहा है। पुनिया बोले कि पुलिस ने कार्रवाई के नाम पर जो मामले में अपराध किया है उसकी सजा उन्हें मिलेगी। उन्होंने उप मुख्यमंत्री के दौरे पर भी सवाल उठाए कि संजली के परिजनों को पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी, लेकिन इसका कुछ अता पता नहीं है। कहा कि सरकार ने मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

पुनिया ने बुलंदशहर और गाजीपुर में हुई घटनाओं में कहा कि जिन आपराधिक घटनाओं में आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग शामिल होते हैं वहां कोई कार्रवाई नहीं होती।

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