कोहरे और ठंड में सिकुड़ते बचपन के कंधे पर भविष्य का बोझ

आगरा। भले ही सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए लाख दावे कर रही है लेकिन ग्रामीण अंचल के प्राथमिक विद्यालयों की दुर्दशा सुधरने का नाम नही ले रही है। स्कूल के अध्यापक स्कूल के हर काम को बेगार समझ औपचारिकताएं पूरी कर हर कार्य को सरकार के ऊपर डाल देते हैं।

हालांकि अभी भी प्रदेश सरकार की अनदेखी व अधिकारियो की सुस्ती की बजह से स्कूलों में आज भी सभी सुविधाएं मुहैया नही हो पाती हैं। दिसम्बर का महीना है और आगरा में सर्दी अपना कहर बरपा रही है। इस कड़कड़ाती ठंड में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे बिना स्वेटर के चप्पलों में स्कूल आ रहे हैं। जानकारी करने पर पता चला कि जूते तो आ गए हैं लेकिन साइज में छोटे हैं इसलिए बांटे नही गए हैं। जबकि स्वेटर तो अभी तक आये ही नही हैं। इस बात को योगी सरकार खुद मान चुकी है कि एक बार टेंडर निरस्त होने के चलते दोबारा टेंडर दिया गया है तब जाकर स्वेटर बच्चो तक पहुच पाएंगे।

आप ही सोचिए इस ठंड छोटे बच्चे किस तरह स्कूल जाएं इसी का नतीजा था कि जब मून ब्रेकिंग की टीम एतमादपुर के बरहन क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला बरी पहुचे तो कुल छात्रों के केवल 50 प्रतिशत छात्र ही उपस्थित थे जानकारी करने पर स्कूल की इंचार्ज अध्यापक रुपाली वर्मा ने बताया कि ठंड की बजह से छात्रों की उपस्थिति में कमी है क्योंकि अभी तक बच्चो को स्वेटर नही मिले हैं। स्कूल के शौचालय पर ताला लगा था और चारो ओर गंदगी का अंबार था।

इस सवाल का ठीकरा अध्यापक महोदया ने गांव के सफाईकर्मी पर फोड़ते हुए कहा कि पिछले एक महीने से सफाईकर्मी नही आया है। कुछ सफाई गांव के लोगो को पैसे देकर कर ली है। वही स्कूल चारदीवारी भी राम भरोसे खड़ी थी। दीवार में जगह जगह बड़े छेद हो चके हैं। जिस कारण वो कभी गिर सकती है, जो किसी बड़े हादसे का सबब बन सकती है। चिलचिलाती सर्दी में बिना स्वेटर के सभी बच्चे सिर्फ मिड डे मील की लाइन में लगकर खाना लेकर घर लौटकर जाते दिखाई दिए।

एतमादपुर से निमेश जादौन के साथ पवन शर्मा की रिपोर्ट

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